भाग्य ने फिर साथ नहीं दिया सोरेन का

रांची, 8 जनवरी (आईएएनएस)। झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का भाग्य एक बार फिर दगा दे गया। तमाड़ विधानसभा उपचुनाव हारने के बाद उनकी कुर्सी खतरे में पड़ गई है। वैसे भी सोरेन को कुर्सी जब भी हाथ लगी है भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया है।

अपने समर्थकों के बीच गुरुजी के नाम से मशहूर सोरेन मई 2004 में केंद्र सरकार में मंत्री बने लेकिन दो महीने के बाद ही उन्हें चिरूडीह हत्याकांड मामले में त्यागपत्र देना पड़ा। इसके बाद उन्हें दो महीनों तक जामताड़ा जेल में रहना पड़ा।

मार्च 2005 में वे पहली बार नौ दिनों के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री बने लेकिन विधानसभा में बहुमत साबित करने में वे अफल रहे। अलबत्ता उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

वर्ष 2006 में वे फिर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) में मंत्री बने लेकिन अपने निजी सहयोगी शशिनाथ झा की हत्या के मामले में फिर उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया।

कांग्रेस के सहयोग से सोरेन अगस्त 2008 में फिर से झारखंड के मुख्यमंत्री बने लेकिन इस दफा वे मुख्यमंत्री बने रहने के लिए छह महीने के भीतर विधानसभा चुनाव जीतने की अनिवार्यता पूरा करने में असफल रहे। उनकी कुर्सी एक बार फिर जाती दिख रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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