ट्रांसपोर्टरों की देशव्यापी हड़ताल जारी

केंद्र सरकार के साथ तीसरे दौर की बातचीत विफल होने के बाद भारत में ट्रांसपोर्टरों की बेमियादी हड़ताल रविवार की रात से शुरु हो गई थी.
उधर ट्रांसपोर्ट सचिव ब्रह्म दत्त ने चेतावनी दी है कि यदि हड़ताल जारी रही तो हड़ताल में शामिल ट्रकों की परमिट रद्द की जा सकती है.
उधर ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष चरण सिंह लोहारा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "यदि सरकार ट्रकों के परमिट रद्द करती है तो प्रतिक्रिया स्वरुप कुछ भी यदि होता है इसके लिए हम ज़िम्मेदार नहीं होंगे."
इससे पहले लोहारा ने बीबीसी से कहा था, " जब तक सरकार हमारी माँगें नहीं मानती है, हड़ताल जारी रहेगी."
इस बीच सरकार ने ठेकेदारों के जरिए गुड़्स ट्रांसपोर्ट एजेंसियों को मिलने वाली कुछ सेवाओं को पूरी तरह से कर मुक्त कर दिया है. इनमें पैकेजिंग, स्टोरेज़ जैसी सेवाएँ शामिल हैं.
लोहारा ने बताया, "हमने सरकार के सामने डीज़ल की क़ीमत प्रति लीटर 10 रुपए कम करने और टायरों के दाम में 35 प्रतिशत कमी की माँग रखी है."
'चक्का जाम'
देश भर में इस हड़ताल से फल और सब्ज़ियों जैसी ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है.
जब तक सरकार हमारी माँगें नहीं मानती है, हड़ताल जारी रहेगी चरण सिंह लोहारा, अध्यक्ष, ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस
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इस हड़ताल में क़रीब 60 लाख ट्रकों और डेढ़ लाख से ज़्यादा ट्रांसपोर्टरों के शामिल होने का दावा चरण सिंह ने किया है.
उन्होंने बताया कि इस चक्का जाम का असर पूरे भारत में पड़ा है.
इससे पहले बॉम्बे गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महासचिव गिरीश अग्रवाल ने पीटीआई को बताया, " हड़ताल या विरोध प्रदर्शन की हद तक हम अंत में ही उतरते हैं. ट्रांसपोर्टरों को लेकर केंद्र सरकार के रवैये और अपने वादों को पूरा करने में सरकार की लगातार असफलता की वजह से हमने चक्का जाम करने का फ़ैसला किया है."












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