संघ नहीं स्वयंसेवकों की उपलब्धियां विशाल : मोहन भागवत
श्री साईं इन्टरनेशनल ऑडिटोरियम में भागवत ने कहा कि श्रेष्ठ खिलाड़ियों के निर्माण के लिए क्रीड़ा भारती में स्वयंसेवक 15-16 सालों से काम कर रहे हैं। वे परम्परागत खेलों को प्रोत्साहन देने तथा नशा मुक्ति के कार्य में भी जुटे हैं। उन्होंने कहा कि संघ कुछ नहीं करेगा, स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेंगे।
बांग्लादेशी घुसपैठ और आतंकवाद पर भागवत ने कहा कि इस विषय पर जो संघ का दृष्टिकोण है, आज उसी का असम के मुख्यमंत्री समर्थन कर रहे हैं। संघ का दृष्टिकोण साफ करते हुए उन्होंने कहा कि संघ की सोच आतंकवाद को मजहब के साथ जोड़कर किसी भी धर्म को बदनाम करने की नहीं है। परंतु हम एक हों यह हमारा कर्तव्य है।
भागवत ने कहा कि व्यक्ति निर्माण बहुत कठिन कार्य है जिसमें छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस समय संघ के लगभग 40 लाख स्वयंसेवक हैं।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति निर्माण, समाज निर्माण, व्यवस्था निर्माण में अब हमें सबको साथ लाना होगा। समाज की मानसिकता के परिवर्तन का वातावरण बनाने की जरूरत है, केवल कानून बदलने से कुछ नहीं हो सकता।
कार्यक्रम में संघ के सह-सरकार्यवाह मदनदास, सुरेश सोनी, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं उत्तर क्षेत्र संघचालक डा़ बजरंग लाल गुप्त, अमेरिका में संघचालक प्रो़ नंदा, दिल्ली प्रांत संघचालक रमेश प्रकाश, भूरेलाल, भाजपा के डा़ हर्षवर्धन, प्रो़ विजय कुमार मल्होत्रा, केदारनाथ साहनी, मदनलाल खुराना, सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिन्दर सिंह, जनता पार्टी के अध्यक्ष डा़ सुब्रहमण्यम स्वामी, पूर्व महालेखाकर टी़ एऩ चतुर्वेदी, जनरल नंदा, एयर चीफ मार्शल टिपणिस, सर गंगाराम अस्पताल के चेयरमैन डा़ बी़ क़े राव, वरिष्ठ पत्रकार संध्या जैन, लेखक प्रो़ महीप सिंह आदि गणमान्य व्यक्तियों के अलावा वाल्मिकि समाज और साधू-संत उपस्थित थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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