कैंसर में काम आएगी दिल की दवा

जॉन्स होपकिन्स युनिवर्सिटी (जेएचयू) के स्कूल ऑफ मेडिसिन द्वारा बाजार में उपलब्ध दवाओं पर किए गए शोध में यह बात सामने आई है।

जेएचयू कोशिका अभियांत्रिकी संस्थान में संचरण कार्यक्रम की निदेशक व मैकुसिक-नाथन्स इंस्टीट्यूट ऑफ जेनेटिक मेडिसिन की सदस्य ग्रेग एल.सेमेंजा ने कहा, "यह वाकई में चकित करने वाला है। जो दवा पहले से एफडीए द्वारा सुरक्षित मानी गई हैं, वह कैंसर प्रभावित कोशिकाओं को जिंदा रखने के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रोटीन उपलब्ध करा सकती है।"

सेमेंजा व उनके सहयोगियों ने कोशिकाओं में उपस्थित ऑक्सीजन में बदलाव के लिए जिम्मेदार हाइपोक्सिया-इंड्यूसिबल फैक्टर यानी एचआईएफ-1 प्रोटीन पर लंबा अध्ययन किया है। यह प्रोटीन जीन को नियंत्रित करता है जो कम ऑक्सीजन की उपस्थिति में भी कोशिका को जीवित रहने में मदद करता है।

एचआईएफ-1 प्रोटीन जीन में पहुंच कर ऑक्सीजन के अभाव में मर रहीं कोशिकाओं को जिंदा रखने के लिए, नई रक्त कणिकाओं का निर्माण करता है। क्योंकि ऑक्सीजन की कम मात्रा के कारण ही कैंसर की ठोस गांठों के निर्माण में तेजी आती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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