बीएनपी ने इस्लामवादियों पर फोड़ा हार का ठीकरा
द डेली स्टार ने गठबंधन के नेताओं के हवाले से लिखा है कि जिस गठबंधन ने वर्ष 2001-06 में दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता का आनंद उठाया था, वह इस बार इसलिए हार गया, क्योंकि युवा मतदाताओं ने धर्म की राजनीति को नकार कर प्रगतिशील राजनीति को अपनाने का मन बनाया।
बीएनपी के पराजित उम्मीदवारों का कहना है कि पहली बार मतदाता बने 32 प्रतिशत युवाओं ने जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) जैसी कट्टरपंथी पार्टी के कारण गठबंधन के उम्मीदवारों को वोट नहीं दिया। क्योंकि इस पार्टी ने बांग्लादेश की आजादी के आंदोलन का विरोध किया था।
दूसरी ओर जमात के नेता इस बात को सिरे से खारिज करते हैं। वे दावा करते हैं कि उन्हें वर्ष 2001 के चुनाव की तुलना में इस बार 14 प्रतिशत अधिक वोट मिले हैं।
ज्ञात हो कि बीएनपी चार इस्लामी पार्टियों के एक गठबंधन का नेतृत्व करती है। जमात इस गठबंधन की एक प्रमुख साझेदार है। पिछली संसद में जमात के 18 सांसद थे। इसके दो सांसद खालिदा के मंत्रिमंडल में मंत्री भी थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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