कोलकाता में आटोरिक्शा चालकों का हिंसक प्रदर्शन, बसें फूंकी गई (लीड)
आटोरिक्शा चालकों के इस आंदोलन को राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का समर्थन है।
पार्क सर्कस इलाके में घटी घटनाओं के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। पूरा इलाका जैसे युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया था। क्रुद्ध प्रदर्शनकारियों ने इलाके में पुलिस कर्मियों व त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) के जवानों की भारी तैनाती के बावजूद चार बसों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "व्यस्त सड़क पर सरकारी बसों में आग लगाने वाले किसी भी प्रदर्शनकारी को पहचान पाने की स्थिति में हम नहीं हैं।"
उधर तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने दावा किया कि राज्य में सत्ताधारी वामपंथी मोर्चे में साझेदार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ताओं ने बसों में आग लगाई।
बनर्जी ने कहा, "माकपा अच्छी तरह जानती है कि उसके पैरों तले जमीन खिसक रही है। इसलिए वह इस तरह की हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रही है। बसों में आग लगाने से समस्या का समाधान नहीं निकलने वाला। शनिवार सुबह हमारा इस तरह का कोई कार्यक्रम नहीं था। यदि इस तरह का हमारा कोई कार्यक्रम होता तो हम कोई 1,000 बसों को आग के हवाले कर दिए होते।"
पुलिस के अनुसार पार्क सर्कस के नजदीक, पुल नं-4, एजेसी बोस रोड सीआईटी रोड व लेडीज पार्क चौराहे पर क्रमश: तीन बसों में आग लगाई गई।
तृणमूल समर्थित 12 घंटे के आटोरिक्शा व टैक्सी हड़ताल के कारण नागरिकों को आवागमन में काफी दिक्कतें हुईं।
ज्यादातर ऐसे वाहन, कोलकाता उच्च न्यायालय के निर्णय के विरोध व गिरफ्तार 18 रिक्शा चालकों की रिहाई की मांग को लेकर सड़क पर उतरे ही नहीं।
प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर अपने वाहन लेकर उतरे आटो व टैक्सी चालकों को भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मजबूर किया।
हाथों में पत्थर व डंडे लिए प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर आटो व टैक्सियों को रोक दिया और यात्रियों को उतार दिया।
तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (टीटीयूसी) के नेता सोबनदेब चट्टोपाध्याय ने कहा, "मैं समझता हूं कि 12 घंटे की हमारी हड़ताल सफल रही। ज्यादातर आटो व टैक्सी सड़कों पर नहीं उतरे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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