पिज्जा बेचकर बुजुर्ग महिलाओं ने बनाया वृद्धाश्रम
बेंगलुरू, 3 जनवरी (आईएएनएस)। बेंगलुरू की दो वृद्धाओं ने समाज सेवा के उद्देश्य से वृद्धाश्रम बनाने का सपना पाला और फिर पिज्जा बेचकर इसे सच भी कर दिखाया।
पिज्जा दादी के नाम से मशहूर 73 वर्षीय पद्मा श्रीनिवासन और 75 वर्षीय जयलक्ष्मी श्रीनिवासन के जहन में वर्ष 2003 में एक वृद्धाश्रम बनाने का विचार आया तो उन्होंने पिज्जा बेचकर इसका निर्माण करने का फैसला किया।
पद्मा ने आईएएनएस को बताया, "मैं हमेशा समाज में अपना योगदान देना चाहती हूं। हमारे समाज में वृद्ध सर्वाधिक उपेक्षित हैं। इसलिए मैं उनके लिए कुछ करना चाहती हूं।"
पद्मा ने इसके लिए पहले बेंगलुरू से 30 किलोमीटर दूर विजयनगर गांव में एक भूखंड खरीदा। एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान से वित्त प्रबंधक के रूप में सेवानिवृत्त पद्मा ने कहा, "भूखंड खरीदने के लिए मैंने अपने पास से 10 लाख रुपये खर्च किए।"
वह आगे बताती हैं, "यह भूखंड 22,000 वर्ग फुट का है। लेकिन अब इस भूखंड पर वृद्धाश्रम का निर्माण करने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे। इस कार्य में 78 लाख रुपये की लागत आने वाली है। इसी दौरान मेरी बेटी सारसा वासुदेवन व मेरी मित्र जयलक्ष्मी ने इस काम हेतु पैसे जुटाने के लिए पिज्जा बनाकर बेचने का सुझाव दिया। इसके साथ ही पिज्जा का मेरा कारोबार शुरू हो गया।"
'पिज्जा हेवेन' नामक पिज्जा की दुकान पद्मा की बेटी के गरेज में शुरू हो गई। जयलक्ष्मी ने कहा, "पिज्जा की आपूर्ति बेंगलुरू के आईटी कंपनियों में शुरू की गई। जल्द ही हमारा पिज्जा यहां के युवा आईटी कर्मचारियों का पसंदीदा बन गया।"
पिज्जा हेवेन में तैयार होने वाले पिज्जा की ज्यादातर खपत एचपी, आईबीएम, सिम्फोनी, एसेंचर व सन माइक्रोसिस्टम्स जैसी शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों में होती है। जयलक्ष्मी मुस्कुराते हुए कहती हैं, "पिज्जा हेवेन की प्रगति भी हमें चकित करती है।"
पिज्जा हेवेन से प्रतिदिन लगभग 200 पिज्जा की बिक्री की जाती है। पिज्जा की कीमत 30 रुपये से 120 रुपये के बीच है।
इस तरह, पिज्जा से होने वाली आय व शुभचिंतकों के आर्थिक सहयोग से वर्ष 2008 के जून महीने में 'विश्रांति' नामक वृद्धाश्रम बनकर तैयार हो गया। 'विश्रांति' में अभी 10 वृद्ध रहते हैं। इस संख्या में जल्द ही बढ़ोतरी होने वाली है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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