मप्र में लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटीं भाजपा और कांग्रेस
विधानसभा चुनाव में मिली सफलता से जहां भाजपा उत्साहित है वहीं कांग्रेस पराजय के सदमे से उबरने की कोशिश कर रही है। 143 सीटें पाकर सत्ता हासिल करने वाली भाजपा मिशन 2009 के लिए कमर कस रही है। इसी क्रम में उसने पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक बुलाई। इस बैठक में पहुंचे सत्ता और संगठन से जुड़े लोगों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का निराकरण करें।
भाजपा के प्रदेश प्रभारी अनंत कुमार, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रदेश कार्यसमिति में सत्ता और संगठन में आपसी समन्वय पर जोर दिया है। उन्होंने पार्टी के जिम्मेदार लोगों के जरिए आम कार्यकर्ता तक यह संदेश पहुंचाने की कोशिश की है कि अब दिल्ली दूर नहीं है। पार्टी के नेता गुटबाजी और कुछ स्थानों पर मिली हार के मसले पर ज्यादा चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है। वे तो लोकसभा चुनाव को अपना लक्ष्य बनाकर चल रहे हैं और असंतुष्टों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की भी तैयारी में है।
मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से अभी 24 पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है और वह किसी भी सूरत में 24 से कम सीटें नहीं चाहती है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अपने पिछले प्रदर्शन को सुधारना चाहती है। विधानसभा चुनाव में मिली पराजय से उबरने की तैयारी पार्टी ने शुरू कर दी है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी विधानसभा चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों से सीधे बातचीत कर रहे है। बैठकों के शुरू हुए इस दौर में पराजित अधिकांश उम्मीदवार अपनी हार के लिए गुटबाजी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए अभी से रणनीति बनाना शुरू कर दी है और उन भितरघातियों को बाहर निकालने की तैयारी शुरू कर दी है जो पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इस तरह मध्यप्रदेश में अभी चुनावी रंग पूरी तरह उतरा भी नहीं है कि दोनो प्रमुख दलों ने एक बार फिर चुनावी माहौल को गरमाने की तैयारी शुरू कर दी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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