भारत को आशा, आतंकवादियों का खात्मा करेगा बांग्लादेश
नई दिल्ली, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। बांग्लादेश के चुनावी नतीजों पर पैनी नजर रखने वाले भारत का मानना है कि पड़ोसी देश में अवामी लीग की नई सरकार अपने यहां लंबे समय से ठिकाना बनाए हुए आतंकवादियों के खिलाफ अंतत: कार्रवाई करेगी।
देश के पूर्वोत्तर में सक्रिय कई आतंकवादी संगठनों के सरगनाओं ने पड़ोसी देश में ठिकाना बना रखा है, इसके कारण पिछले कुछ वर्षो में दोनों देशों के संबंधों में कटुता आई है। हालांकि, ढाका में सेना समर्थित अंतरिम सरकार के साथ वर्तमान रिश्तों में सुधार हुआ है।
असम में सक्रिय आतंकवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम (उल्फा) और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (एनएससीएन) आज भी बांग्लादेश की सरहद का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। एनएससीएन की भारत सरकार के साथ बातचीत चल रही है।
नई दिल्ली को आशा है कि पड़ोसी देश में शेख हसीना की नई सरकार भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर करेगी।
हालांकि यह सब इतना आसान नहीं है लेकिन आशा व्यक्त की जा रही है कि भारी बहुमत से विजयी हुई शेख हसीना इतिहास को भूलकर भारत के साथ संबंधों को एक नया आयाम देंगी। दरअसल, बांग्लादेश हमेशा अपनी सरजमीं का भारत विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने से इनकार करता रहा है।
बांग्लादेश और भारत के बीच मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर विवाद है। इसमें सुरक्षा, जल बंटवारा और सड़क संपर्क का मुद्दा शामिल है।
नई दिल्ली में अधिकारियों का विश्वास था कि धर्मनिरपेक्ष छवि वाली अवामी लीग की जीत होगी लेकिन वे शेख हसीना की इतनी भारी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं थे।
अवामी लीग की स्थापना बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान ने की थी। वर्तमान में इसका नेतृत्व उनकी बेटी शेख हसीना के हाथों में है। बांग्लदेश के इस चुनाव में पाकिस्तान समर्थित इस्लामी ताकतों का करीब-करीब सफाया हो गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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