एलआईसी अब भी सब पर भारी

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मुंबई, 29 दिसंबरः बीमा व्यवसाय में निजी क्षेत्र के प्रवेश के आठ साल बाद भी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) बाकी 20 निजी कंपनियों के सम्मिलित कारोबार पर भारी पड़ रही है। ऐसा लोगों का एलआईसी के प्रति भरोसे के कारण हो पाया है।

बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) के अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर तक एलआईसी की व्यक्तिगत बीमा प्रीमियम आय में 29 फीसदी कमी आई है। वित्त वर्ष 2007-08 में अक्टूबर तक एलआईसी की व्यक्तिगत बीमा प्रीमियम आय 21,427 करोड़ रुपए थी।

चालू वित्त वर्ष 2008-09 में अक्टूबर तक यह घटकर 15,248 करोड़ रुपए रह गई है। एलआईसी की व्यक्तिगत एकल प्रीमियम और व्यक्तिगत गैर-एकल प्रीमियम दोनों की आय में कमी आई है। एकल प्रीमियम आय में 2042 करोड़ और गैर-एकल प्रीमियम आय में 4137 करोड़ रुपए की कमी आई है।

एलआईसी के एक अधिकारी का इस बारे में कहना है कि निगम के नए व्यवसाय की यह तुलनात्मक कमी है। निजी कंपनियों के आने के बाद ऐसा होना एकदम स्वाभाविक है। इसके अलावा इसी अवधि में एलआईसी की समूह एकल प्रीमियम आय 4474 करोड़ रुपए से ४८ फीसदी बढ़कर 6626 करोड़ रुपए हो गई है।

कुल मिलाकर स्थिति यह है कि देश में जीवन बीमा का व्यवसाय बढ़ रहा है। उनकी बात की तस्दीक आईआरडीए के ताजा आंकडे भी करते हैं, जिनके मुताबिक सभी जीवन बीमा कंपनियों की प्रीमियम आय वित्त वर्ष 2007-08 में अक्टूबर तक के आठ महीनों में 38,615 करोड़ रुपए थी, जो चालू वित्त वर्ष 2008-09 में अक्टूबर तक के आठ महीनों में 39,686 करोड़ रुपए रही है। एलआईसी अधिकारी ने कहा कि हालांकि यह महज 1071 करोड़ यानी 2.8 फीसदी की वृद्धि है, लेकिन आर्थिक सुस्ती के दौर में इतनी बढ़त भी कम नहीं मानी जा सकती।

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