आतंकवाद के खिलाफ पाक की भूमिका की समीक्षा
दैनिक समाचार पत्र 'डॉन' ने बुधवार को खबर दी है कि देश की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए सीनेटरों ने मुंबई हमले के बाद भारत के आधारहीन आरोपों का जवाब देने और दुनिया को पाकिस्तान के एक जिम्मेदार राष्ट्र होने के बारे में बताने के लिए एक राजनयिक पहल शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अखबार के अनुसार उन्होंने कराची से 10 लोगों के एक गिरोह के मुंबई जाकर हमला करने के भारत के बेसिर-पैर के आरोप को खरिज कर दिया।
उन्होंने जमात-उद-दावा के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लगाने के तरीके पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा भारत के अनुरोध पर किया गया। समाचार पत्र के अनुसार सीनेटरों ने कुछ रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि चीन संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को रोकना चाहता था, लेकिन कथित रूप से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने ऐसा न करने के लिए दबाव डाला।
अखबार के अनुसार सांसदों ने इस मामले में सरकार से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
सीनेट में विपक्ष के नेता कामिल अली आगा ने सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित होते समय पाकिस्तान के स्थायी राजदूत के संयुक्त राष्ट्र से अनुपस्थित रहने पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने इंटरपोल दल के पाकिस्तान पहुंचने को चेतावनी की संज्ञा देते हुए कहा कि इस दौरे का मकसद मुंबई हमले में पाकिस्तान को फंसाना है।
आगा ने आरोप लगाया कि अमेरिका, पाकिस्तान को पूर्वी सीमा पर उलझाकर अपने हित साधना चाहता है। उन्होंने सरकार से चतुराई से देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करने का आग्रह किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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