भारत दूसरी सबसे तेज अर्थव्यवस्था बना रहेगा : चिदंबरम (लीड-1)
नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि वैश्विक वित्तीय संकट के कारण देश कठिन चुनौतियों से निपट रहा है और संभवत: इस संकट का देश की अर्थव्यवस्था पर असर भी पड़े, लेकिन कोई आर्थिक मंदी नहीं है।
यहां आर्थिक संपादकों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, "आर्थिक मंदी का मतलब होता है लगातार दो तिमाहियों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट। मैं यहां स्पष्ट करना चाहूंगा कि हम आर्थिक मंदी के करीब नहीं हैं।"
उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में शुरू हुआ वित्तीय संकट की स्थिति कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं जर्मन, जापान, ब्रिटेन और नीदरलैंड के आधिकारिक रूप से मंदी से ग्रस्त होने की घोषणा के बाद और खराब हो गई। इस सूची में अमेरिकी, फ्रांस और कई और देश जुड़ने वाले हैं।
चिदंबरम ने कहा, "मेरे विचार से, हम चालू वित्त वर्ष में सात से आठ फीसदी के बीच विकास दर की आशा कर सकते हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी दुनिया की सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि देश अभी भी कठिन चुनौतियों का सामना कर रहा है लेकिन वैश्विक संकट का घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर को कम से कम करने के लिए सरकार सभी संभव वित्तीय व मौद्रिक कदम उठाएगी।
वित्त मंत्री के मुताबिक निर्माण, संचार, व्यापार, कृषि और विनिर्माण क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और इन क्षेत्रों में औसत दर से विकास होने की संभावना है। इसके परिणामस्वरूप भारत को विकास दर बढ़ाने के लिए सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डा, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र में भारी निवेश की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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