नवजात ने दिया दो बच्चों को नेत्रदान

इस दंपत्ति के यहाँ शादी के चार साल बाद बच्चा पैदा हुआ था लेकिन जन्म के पंद्रह दिन बाद ही इस बच्चे की मौत हो गई थी.
उनके इस फ़ैसले की वजह से अब दो नेत्रहीन बच्चों के जीवन में रौशनी आ गई है और वे इस ख़ूबसूरत दुनिया को देखने के लायक हो गए हैं.
मिसाल
कोलकाता से सटे हावड़ा जिले के सांतरागाछी में रहने वाले शुभदीप और डोला सांतरा ने इस फ़ैसले से डॉक्टरों के साथ-साथ अपने घरवालों और पड़ोसियों का भी दिल जीत लिया है.
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नवजात शिशु जन्म के समय से ही गंभीर हृदय रोग से पीड़ित था. उसे सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रखा गया था. वहाँ उसकी मंगलवार सुबह मौत हो गई.
इससे सांतरा दंपत्ति टूट गए लेकिन दुख की इस घड़ी में भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया और डॉक्टरों से पूछा कि क्या वे अपने बच्चे के अंग दान कर सकते हैं.
शुभदीप एक मोबाइल फ़ोन कंपनी में काम करते हैं. बच्चे की मौत के बाद वे और उनकी पत्नी सदमे में हैं और किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं.
शुभदीप के एक दोस्त इंद्रजीत राय कहते हैं, "बच्चे की मौत के बाद जब दोनों ने उसके अंग दान करने की इच्छा जताई तो हमने रामराजातला नवीन संघ आई बैंक और मेडिकल कॉलेज़ अस्पताल से संपर्क किया."
पहली बार पंद्रह दिन के किसी के बच्चे की आँखें दान की गई हैं
आई बैंक के स्वपन पांजा कहते हैं, "पहले तो हमारे डॉक्टर ऐसा अनुरोध सुन कर हैरत में पड़ गए. इससे पहले उन लोगों ने कभी इतने छोटे शिशु की कार्निया नहीं निकाली थी."
पहली बार
वे बताते हैं, "अब तक जो सबसे छोटा कार्निया निकाला गया था, वह चार महीने के एक शिशु का था. उसे 2005 में कोलकाता के टालीगंज इलाक़े में निकाला गया था लेकिन हमने राज्य सरकार के आई बैंक के निदेशक से बात की. उन्होंने कहा कि ऐसा किया जा सकता है."
इसके बाद मंगलवार दोपहर सांतरा दंपत्ति के मृत शिशु का कार्निया निकालकर राज्य सरकार के रीजनल इंस्टीट्यूट आफ ऑप्थालमोलॉजी को सौंप दिया गया.
इस कॉर्निया का प्रत्यारोपण बुधवार को दो नेत्रहीन बच्चों में कर दिया गया.
सांतरा दंपत्ति के एक पड़ोसी प्रेमांकुर कहते हैं, "पहले बच्चे के जन्म के दो हफ़्ते बाद ही उसे खोने के गम में डूबे होने के बावजूद इस दंपती ने जो फ़ैसला किया, वह दूसरों के लिए मिसाल बन सकता है."












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