अहिंसा का संदेश फैलाने वाले सीमांत गांधी पर वृत्तचित्र
मुहम्मद नजीब
मुहम्मद नजीब
इस्लामाबाद, 12 नवंबर (आईएएनएस)। सीमांत गांधी के नाम से अधिक प्रसिद्ध खान अब्दुल गफ्फार खान पर तैयार एक नए वृत्तचित्र में यह दिखाया गया है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर स्थित कबायली इलाके में शांति बहाली कितनी कठिन है, "जहां हर कोई अपने दुश्मन का सिर काटने की ताक में रहता है।"
कनाडा के प्रसिद्ध मीडिया सिद्धांतकार मार्शल मैक्लूहान की पुत्री टेरी मैक्लूहान ने इस पठान नेता पर " फ्रंटियर गांधी बादशाह खान, शांति की मशाल" नामक इस वृत्तचित्र का निर्माण किया है। सीमांत गांधी का वर्ष 1988 में 98 वर्ष की उम्र में देहांत हो गया था।
वृत्तचित्र में प्रसिद्ध गांधीवादी निर्मला देशपांडे ने कहा कि महात्मा गांधी ने उनसे गफ्फार खान के बारे में कहा था, "उनकी उपलब्धियां चमत्कारी हैं और वे सिद्धातवादी इंसान हैं।" इस वर्ष देशपांडे की मृत्यु से पहले रिकार्ड किए गए कुछ अंतिम साक्षात्कारों में से यह एक है।
91 मिनट के इस वृत्तचित्र को बनाने में 21 वर्ष लगे। वृत्तचित्र का अधिकांश भाग पश्तो, उर्दू, हिंदी और दारी भाषा में अंग्रेजी उपशीर्षकों
के साथ है। इसमें बंटवारे के पहले के समय के कुछ दुर्लभ फोटो और दृश्य हैं।
वृत्तचित्र में बादशाह खान के गांधीजी के साथ जुड़ाव और ब्रिटिश राज के खिलाफ उनके साझा अहिंसात्मक संघर्ष को दर्शाया गया है।
बादशाह खान ने एक बार कहा था, "अहिंसात्मक संघर्ष के लिए आपको किसी शक्ति की आवश्यकता नहीं होती और इसमें हमेशा आपकी ही जीत होती है।"
देशपांडे के अलावा वृत्तचित्र निर्माता ने पत्रकार एम.जे.अकबर, पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल, पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ, अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई और बादशाह खान के परिवार के सदस्यों का साक्षात्कार लिया।
वृत्तचित्र में देशपांडे ने बताया कि अपनी अंतिम मुलाकात में बादशाह खान ने उनसे कहा, "गांधीजी के हिंदुस्तान में यह क्या हो रहा है..हर कोई यहां पैसे और सत्ता के पीछे भाग रहा है।"
फिल्म का अंत बंटवारे के हिंसात्मक दंगों और गांधीजी की हत्या तथा इन सब की वजह से बादशाह खान को बहुत गहरे दुख के दृश्यों के साथ होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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