मारग्रेट अल्वा का इस्तीफा मंजूर, कार्यसमिति से भी हटाई गईं (लीड-1)
नई दिल्ली, 12 नवंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता व पार्टी महासचिव मारग्रेट अल्वा को पार्टी के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी करने की सजा दे दी गई है। आखिरकार उन्हें पार्टी महासचिव पद के साथ-साथ दो अन्य महत्वपूर्ण पदों से भी हाथ धोना पड़ गया। अल्वा ने पिछले दिनों कहा था कि कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस में टिकटों की बिक्री की गई थी।
अल्वा को कांग्रेस कार्यसमिति और केंद्रीय चुनाव समिति से भी हटा दिया गया है। इसके अलावा उनसे महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और मिजोरम समेत सात राज्यों का प्रभार भी वापस ले लिया गया। ज्ञात हो कि मिजोरम में आगामी दो दिसंबर को चुनाव होने वाले हैं।
पार्टी ने अस्थायी तौर पर लगे हाथ इन सात राज्यों के प्रभारियों का ऐलान भी कर दिया। रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी को महाराष्ट्र, श्रम मंत्री ऑस्कर फर्नाडीज को नागालैंड, मेघालय और मिजोरम, पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा को हरियाणा, मोहसिना किदवई को पंजाब व चंडीगढ़ का प्रभार सौंप दिया।
कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने आईएएनएस को बताया, "कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह फैसला अनुशासन समिति के अध्यक्ष ए. के. एंटनी की रिपोर्ट पर लिया है। वैसे भी स्पष्ट हो गया कि कर्नाटक चुनाव में उनके बेटे को टिकट नहीं मिलने से वह नाराज थीं और इसलिए उन्होंने अपना गुस्सा उक्त आरोप लगाकर निकाला।"
अल्वा ने मंगलवार को खुद पर अनुशासनहीनता का आरोप लगने के बाद महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। पिछले सप्ताह उन्होंने एक साक्षात्कार में सवाल उठाया था कि उनके पुत्र निवेदित और पूर्व केंद्रीय मंत्री सी. के. जाफर शरीफ के पौत्र को कर्नाटक चुनावों में टिकट नहीं दिया गया जबकि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और जम्मू एवं कश्मीर में होने जा रहे चुनावों में 20 से ज्यादा नेताओं के संबंधियों को टिकट दिए गए हैं।
अल्वा ने कहा था, "क्या मेरा पुत्र और शरीफ का पौत्र आतंकवादी या तस्कर थे जो उन्हें टिकट से वंचित रखा गया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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