विस्फोटकों को बांधने के लिए 'प्लास्टिसर्स' का इस्तेमाल किया गया : एनएसजी प्रमुख

नई दिल्ली, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। राजधानी दिल्ली में शनिवार शाम हुए सिलसिलेवार धमाकों में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट को बांधने के लिए आतंकवादियों ने 'प्लास्टिसर्स' का उपयोग किया था। इन धमाकों में 23 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

नई दिल्ली, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। राजधानी दिल्ली में शनिवार शाम हुए सिलसिलेवार धमाकों में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट को बांधने के लिए आतंकवादियों ने 'प्लास्टिसर्स' का उपयोग किया था। इन धमाकों में 23 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के प्रमुख जे.के. दत्त ने आईएएनएस को एक विशेष भेंट में बताया, "दिल्ली में फटे बमों में अमोनियम नाइट्रेट मिला है। विस्फोट में इस्तेमाल की गई बाल बियरिंग और अन्य नुकीले पदार्थो का लचीलापन बढ़ाने के लिए 'प्लास्टिसर्स' का इस्तेमाल किया गया था।"

प्लास्टिसर्स वे पदार्थ होते हैं जिनका उपयोग किसी अन्य वस्तु का लचीलापन बढ़ाने के लिए किया जाता है। इनकी सहायता से प्लास्टिक, सीमेंट, कंक्रीट आदि सभी पदार्थो का लचीलापन बढ़ाया जा सकता है।

दत्त ने कहा, "मैं यह तो नहीं कह सकता कि पिछले दिनों जयपुर, बेंगलुरू और अहमदाबाद में हुए धमाकों के लिए जिम्मेदार लोगों ने ही ये धमाके किए हैं लेकिन बमों की प्रकृति में काफी समानता थी।"

यह पूछे जाने पर कि क्या इन विस्फोटों में आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया? दत्त ने कहा कि वे अभी इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते। उन्होंने बमों को कम या ज्यादा क्षमता वाले वर्गो में बांटने से इंकार करते हुए कहा कि नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि बम कितनी भीड़भाड़ वाली जगह में रखा गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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