रोमांच और सुकून का साम्राज्य है असम के चाय बागानों में
तिनसुकिया,11 अगस्त(आईएएनएस)। क्या आपने कभी किसी पगडंडी से गुजरते वक्त तेंदुए को शाही अंदाज में चहलकदमी करते या शिकार के पीछे फर्राटा दौड़ लगाते देखा है? अगर आप यहां के चाय बागानों से गुजरें, तो कभी भी आपको ऐसा रोमांचकारी नजारा दिख सकता है। पर्यटकों की पसंद बनते जा रहे असम के चाय बागान रोमांच, रहस्य व सुकून जैसी खूबियों से लैस हैं।
तिनसुकिया,11 अगस्त(आईएएनएस)। क्या आपने कभी किसी पगडंडी से गुजरते वक्त तेंदुए को शाही अंदाज में चहलकदमी करते या शिकार के पीछे फर्राटा दौड़ लगाते देखा है? अगर आप यहां के चाय बागानों से गुजरें, तो कभी भी आपको ऐसा रोमांचकारी नजारा दिख सकता है। पर्यटकों की पसंद बनते जा रहे असम के चाय बागान रोमांच, रहस्य व सुकून जैसी खूबियों से लैस हैं।
दुनिया में अपनी उत्कृष्ट चाय के लिए विख्यात असम में कई चाय बागान हैं। महानगरों व शहरों की चिल्ल-पों से आजिज आ चुके लोगों को यहां सुकून व राहत की छांव में मौजमस्ती करने का मौका मिलता है। ऊपरी असम के तिनसुकिया शहर से सटा महाकाली टी एस्टेट ऐसे ही बागानों में से एक है। यहां के खूबसूरत बंगलों में ठहरकर या बागानों में चहलकदमी कर जिंदगी के उन तमाम पुरसुकून लम्हों को कुछ समय के लिए लौटाया जा सकता है, जिनसे लोग शहरों में वंचित रहते हैं।
यहां के बागानों की खूबियों को ध्यान में रखकर पर्यटन मंत्रालय ने इन्हें पर्यटन केंद्रों के तौर पर प्रोमोट करना शुरू कर दिया है। यहां आने वाले पर्यटक अपने पसंदीदा पेय चाय की उत्पादन प्रकिया से भी अवगत हो सकते हैं। महाकाली एस्टेट तक पहुंचने के लिए बोराजान फॉरेस्ट रिजर्व से होकर गुजरना पड़ता है। जंगल से होकर 1़5 किलोमीटर तक का यह सफर पर्यटकों को दादी-मां की वे कहानियां याद दिलाता देता है, जो वे बचपन में सुना करते थे। रास्ते में दुर्लभ जंगली जानवरों के दर्शन मामूली बात है। यह जंगल हूलुक प्रजाति के 6400 बंदरों का आशियाना है।
इस बागान के एक स्थानीय डाक्टर जियाउर रहमान कहते हैं, "यहां तेंदुए जैसे जानवरों को घूमते देखा जा सकता है। मैं खुद इसका गवाह रहा हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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