जन्म प्रमाण पत्र में लड़का होने की सजा यह मिली कि वह पढ़ न सकी

कुआलालम्पुर, 26 जुलाई (आईएएनएस)। वह है तो लड़की, लेकिन आधिकारिक तौर पर लड़का होने की सजा भुगत रही है। इसी वजह से उसे बीच में ही पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी। जन्म प्रमाण पत्र में हुई गलती ने उसे लड़का बना दिया और उसे पढ़ाई से वंचित होना पड़ा।

मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर में रहने वाली भारतीय मूल की टी. गोमाथी के साथ कुछ ऐसा ही हादसा हुआ है। दरअसल, गोमाथी के जन्म प्रमाण पत्र में गलती से उसे लड़का बताया गया है। इस गलती को सुधरवाने के लिए वह पिछले छह सालों से राष्ट्रीय पंजीकरण विभाग (एनआरडी) के चक्कर लगा रही थी लेकिन सफलता उसे पिछले सप्ताह मिली। वह भी महिला, परिवार व समुदाय विकास मंत्रालय द्वारा लगाए गए एक विशेष शिविर में।

गोमाथी अब 18 वर्ष की हो गई है लेकिन वह पढ़ाई से वंचित रह गई। जन्म प्रमाण पत्र में हुई इस गलती का पता उस वक्त चला जब वह 12 वर्ष की थी और वह भी तब जब उसने राष्ट्रीय पहचान पत्र के लिए आवेदन किया।

गोमाथी ने 'न्यू स्ट्रेट टाइम्स' अखबार को बताया, "इस छोटी सी गलती के कारण मैं अपनी पढ़ाई नहीं कर सकी। मुझे बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी।"

गोमाथी से स्कूल के अधिकारियों ने कहा कि वह अपनी मां को लेकर आए, लेकिन चूंकि गोमाथी जब 11 वर्ष की थी तो उस वक्त उसकी मां गुम हो गई थी। अलबत्ता उसने जब स्कूल के अधिकारियों को यह दास्तान सुनाई तो उन्होंने गोमाथी की एक न सुनी।

उल्लेखनीय है कि 1957 में भारत के आजाद होने के बाद यहां आकर बसे लोगों को अक्सर जन्म प्रमाण पत्र संबंधी ऐसी शिकायतों का सामना करना पड़ता है। मलेशियाई सरकार ने ऐसे लोगों को उस वक्त ही जन्म प्रमाण पत्र और पहचान पत्र बनाने को कहा था, लेकिन लोगों ने उस वक्त इसकी महत्ता नहीं समझी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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