हाथियों से बचाव के लिए बाघ के पेशाब व ऊंट का इस्तेमाल
रांची, 10 जून (आईएएनएस)। झारखंड के ग्रामीण जानलेवा हमला करने वाले हाथियों से अपनी जान बचाने व फसलों की रक्षा के लिए बाघ के पेशाब का छिड़काव और ऊंट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
राजधानी से 70 किलोमीटर दूर बेरो प्रखंड में फिलहाल दो ऊंट हमलावर हाथियों से ग्रामीणों की सुरक्षा में तैनात हैं। पूर्णपारी गांव के योगेश बैठा ने कहा, "ऊंटों के आने के बाद हाथियों का इस तरफ आना बंद हो गया है। दोनों ऊंट हम लोगों के लिए देवदूत की तरह हैं। अब हम लोगों को जान जाने या फसल के बरबाद होने की चिंता नहीं है।"
एक दूसरे ग्रामीण श्यामापद ने कहा, "दो ऊंटों को गांव में रखा गया है, जिसकी वजह से अब हाथी इधर नहीं आते हैं क्योंकि हाथियों को ऊंट की गंध बर्दाश्त नहीं होती है।"
इसके अलावा रांची जिले के सिल्ली प्रखंड में गांववाले जैव उद्यान से बाघ के पेशाब को लाकर गांव के निकट उसका छिड़काव कर रहे हैं, जिससे हाथियों को गांव में प्रवेश करने से रोका जा सके।
वन विभाग के अनुसार गत छह वर्षो में हाथियों के हमले में यहां 400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 700 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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