यूपी में प्रस्तावित जिलों के गठन का मामला ठंडे बस्ते में

लखनऊ, 10 जून (आईएएनएस)। खागा और सोरों तहसीलों को लेकर हाल ही में हुए जनविरोध के बाद नए जिलों और तहसीलों के गठन की कवायद ठंडे बस्ते में चली गयी है।

लखनऊ, 10 जून (आईएएनएस)। खागा और सोरों तहसीलों को लेकर हाल ही में हुए जनविरोध के बाद नए जिलों और तहसीलों के गठन की कवायद ठंडे बस्ते में चली गयी है।

इस संबंध में सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति के एक सदस्य ने गोपनीयता की शर्त पर आईएएनएस को बताया कि समिति के समक्ष जिन जिलों और तहसीलों के गठन के प्रस्ताव आए थे वे मानकों के अनुरूप नहीं थे और इस बात की प्रबल संभावना थी कि जगह-जगह इनका विरोध होता।

गौरतलब है कि मायावती सरकार ने राजस्व परिषद के अध्यक्ष विनोद मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की है जिसमें प्रमुख सचिव वित्त, प्रमुख सचिव नियोजन और लखनऊ के मंडलायुक्त शामिल हैं।

उच्चाधिकार प्राप्त समिति के एक सदस्य ने बताया कि समिति की 30 मई को हुई बैठक में इसके समक्ष चार नए जिलों और 11 नई तहसीलों के गठन के प्रस्ताव आए थे। झांसी में मऊरानीपुर और बाराबंकी में रामनगर तथा लखीमपुर खीरी में दो नए जिले (पलिया कला और मोहम्मदी) बनाने का प्रस्ताव था।

जिन नई तहसीलों का प्रस्ताव समिति के समक्ष आया उनमें बड़हलगंज (गोरखपुर), गौरी बाजार (देवरिया), गोपालपुर (आजमगढ़), मितौली (लखीमपुर खीरी), गंगोह (सहारनपुर), किश्नी (मैनपुरी), फफूंद (औरैया), शिवली (कानपुर देहात), नारहट (ललितपुर), कासिमाबाद (गाजीपुर) और सिरसागंज (फिरोजाबाद) शामिल हैं।

उच्चाधिकार प्राप्त समिति के सदस्य ने बताया कि खागा और सोरों के अनुभव के बाद सरकार नए जिलों और तहसीलों को लेकर किसी तरह की जल्दबाजी नहीं चाहती। विदित है कि सरकार ने फतेहपुर की खागा तहसील को कौशाम्बी जिले में शामिल करने का निर्णय किया था लेकिन स्थानीय नागरिकों के प्रबल विरोध के चलते उसे इस निर्णय को स्थगित करना पड़ा।

इसी प्रकार नवगठित कांशीराम नगर जिले में पहले सोरों को तहसील बनाने का निर्णय हुआ लेकिन फिर इसे समाप्त कर शहाबर को तहसील बनाने का निर्णय हुआ जिसका जबरदस्त हिंसक विरोध हुआ। पुलिस फायरिंग में एक व्यक्ति की जान गयी और सार्वजनिक सम्पत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया। दस दिन बीत जाने के बाद अभी भी सोरों कस्बे में अधिकांश दुकानें बंद हैं और वहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

खागा और सोरों को लेकर जनाक्रोश देखने के बाद सरकार ने नए जिलों और तहसील के मामले में फिलहाल अपने कदम खींच लिए हैं। समिति के सदस्य ने स्वीकार किया कि नए जिलों और तहसीलों का सृजन प्रशासनिक कम और राजनीतिक कारणों से अधिक होता है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल राजनीतिक कारणों से ही इस मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। अगले एक साल से भी कम समय में लोकसभा चुनाव होने हैं और बसपा की मौजूदा सरकार नए जिलों और तहसीलों का सृजन कर किसी तरह के विवाद को जन्म देकर अपने विरोधियों को कोई ऐसा मुद्दा नहीं देना चाहती जिससे उसके प्रति जनमानस आक्रोशित हो जाए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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