आईआईटी कानपुर में छात्रों की आत्महत्या का सिलसिला जारी

लखनऊ, 8 जून (आईएएनएस)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में पिछले तीन सालों के भीतर हुई पांच छात्रों की आत्महत्या के मामले ने यहां की ग्रेडिंग प्रणाली और शिकायत निवारण तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिया है।

लखनऊ, 8 जून (आईएएनएस)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में पिछले तीन सालों के भीतर हुई पांच छात्रों की आत्महत्या के मामले ने यहां की ग्रेडिंग प्रणाली और शिकायत निवारण तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिया है।

पिछली 30 मई को बी. टेक (फाइनल वर्ष) की छात्रा रितिका टोया चटर्जी ने आत्महत्या कर ली थी। वह अंतिम सेमिस्टर की दो परीक्षाओं में फेल हो गई थी जबकि उसके पास सभी छह भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) में दाखिले का मौका था।

पिछले 45 दिनों के भीतर यह आत्महत्या का दूसरा जबकि पिछले तीन वर्षो में सातवां मामला था। सात में से पांच छात्रों ने परीक्षा में फेल होने की वजह से आत्महत्याएं की है।

आईआईटी-कानपुर के पूर्व छात्रों के संघ ने अब आत्महत्याओं से जुड़े इन मामलों को लेकर गंभीरता दिखाई है। संघ ने संस्थान प्रशासन द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर अपनाई जा रही प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाया है।

आईआईटी-कानपुर के पूर्व छात्रसंघ के संस्थापक सदस्य ओमेंद्र भारत ने आईएएनएस को बताया, "परीक्षाओं की खराब ग्रेडिंग प्रणाली और खराब शिकायत निवारण तंत्र का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा कुछेक शिक्षकों का छात्रों के साथ गैर-मैत्रीपूर्ण रवैया भी इसके लिए जिम्मेदार है।"

उन्होंने कहा कि रितिका की आत्महत्या के मामले ने एक बार फिर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को सवालों के घेरे में ला दिया है।

उन्होंने कहा कि रितिका जैसी छात्रा, जिसने सभी आईआईएम संस्थानों की परीक्षाएं व साक्षात्कार पास कर लिए हो, वह फेल कैसे हो सकती है। यह अपने आप में संस्थान प्रशासन द्वारा बरती जा रही अनियमितताओं की पोल खोलने के लिए काफी है।

प्रशासन के रवैये से नाराज पूर्व छात्रसंघ के एक सदस्य ने सूचना के अधिकार के तहत संस्थान से रितिका के परीक्षा परिणाम की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है। संघ ने उन सभी छात्रों के परीक्षा परिणाम की प्रति भी मांगी है, जिन्होंने फेल होने की वजह से आत्महत्या कर ली थी।

इस बीच आईआईटी कानपुर के कुछ छात्रों ने भी आत्महत्या के बढ़ते मामलों के लिए संस्थान के कुछ प्रोफेसरों द्वारा अनावश्यक रूप से छात्रों पर दबाव बनाए जाने को कारण माना है।

अक्षत चंद्र नामक एक पूर्व छात्र ने आईएएनएस से कहा, "कुछ प्रोफेसरों की परीक्षा से ठीक पहले छात्रों को काम देने की प्रवृत्ति बन चुकी है।"

अक्षत ने तीन साल पहले आईआईटी-कानपुर की पंचवर्षीय एकीकृत एम.एससी में दाखिला लिया था। लेकिन अत्यधिक दबाव के कारण उसने दूसरे ही वर्ष में पढ़ाई छोड़ दी। अक्षत ने बताया कि कुछ प्रोफेसर तो छात्रों को परीक्षा में फेल करने की धमकियां तक देते रहते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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