थाइलैंड में घायल हाथियों को मिल रहा है माँ का दुलार

लांपांग (थाईलैंड), 6 जून (आईएएनएस)। उत्तरी थाईलैंड के लांपांग शहर की सोरिदा सलवाला को देश भर में 'हाथियों की मां' कह कर पुकारा जाता है। उन्हें यह नाम उस समय मिला, जब उन्होंने 1993 में हाथियों के इलाज के लिए एक क्लीनिक शुरू की।

'फ्रेंड्स ऑफ द एशियन एलिफेंट फाउंडेशन' नामक संस्था की स्थापना करने वाली सोरिदा का यह क्लीनिक मुख्यत: दान की राशि से चलता है।

सन 1980 के दशक के अंत में जब देश में हाथियों के व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया, तो कई हाथी मालिकों ने उन्हें जंगल में छोड़ दिया, जबकि कई उनके साथ दूसरे शहरों में चले गए।

पर्यटकों के आगमन के समय उन्हें आकृष्ट करने के लिए वहां हाथियों के बनावटी शिविर लगाए जाते, लेकिन बाकी समय उनकों ऐसे ही उपेक्षित छोड़ दिया जाता। इसी बात से दुखी होकर 52 वर्षीय सोरिदा ने हाथियों की क्लीनिक खोलने का निर्णय लिया।

भूस्खलन से घायल नन्हीं हथिनी मोशा को जब यहां लाया गया, तो उसका एक पैर लगभग बेकार हो चुका था। सोरिदा ने उसे एक नकली पैर लगाया अब वह अपने नकली पैर के सहारे काफी हद तक चलना सीख गयी है।

गौरतलब है कि इस क्लीनिक में एक साथ 25 हाथियों को रखा जा सकता है। उनमें छोटी मोशा से लेकर 77 साल के तांतोंग जैसे जीव भी शामिल हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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