गरीबों के कश ज्यादा, अमीरों के हैं कम

वाशिंगटन, 6 जून (आईएएनएस)। धूम्रपान करने का तरीका लोगों की शिक्षा, हैसियत और उनका पिछला सामाजिक-आर्थिक जीवन स्तर बताता है। यह बात एक नए अध्ययन में सामने आई है।

ओटागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने उपनगरों के लोगों के धूम्रपान करने के तरीके को अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि उपनगरों में रहने वाले लोग तब तक सिगरेट पीते हैं जब तक की वह छोटे से टुकड़े में तब्दील न हो जाए।

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में बताया कि अमीर लोग, गरीबों की तुलना में अधजली सिगरेट फेंक देते हैं और उनकी सिगरेट में करीब 75 फीसदी बिना जला तंबाकू शेष बचा रहता है।

शोधप्रमुख थामसन ने बताया, "हम अध्ययन में जानना चाहते थे कि क्या अलग-अलग सामाजिक परिवेश से आने वाले लोगों में तंबाकू के सेवन का प्रतिशत अलग है। हमने पाया कि गरीब लोग सिगरेट को आखिरी छोर तक पी जाते हैं क्योंकि उनके पास धन का अभाव रहता है।"

उन्होंने कहा कि धूम्रपान की आदतों में सामाजिक-आर्थिक परिवेश बहुत बड़ी भूमिका होती है।

इस अध्ययन के निष्कर्षो को 'निकोटिन एंड टोबैको रिसर्च' नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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