पश्चिम बंगाल बंद से बुद्धिजीवियों में असंतोष (लीड-1)
कोलकाता, 5 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और विपक्षी तृणमूल कांग्रेस पार्टी द्वारा बारी-बारी से गुरुवार और शुक्रवार को बंद का आह्वान करने से आम नागरिकों को चार दिनों की साप्ताहिक छुट्टी मिल रही है। इसके बाावजूद राज्य की जनता इन पार्टियों से नाराज है।
केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ाए जाने के विरोध में एलडीएफ ने गुरुवार को राज्य बंद की घोषणा की थी जबकि तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को राज्य बंद का ऐलान किया है।
फिल्म निर्देशक गौतम घोष ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "निजी तौर पर इस बंद को मैं एक मजाक के रूप में देखता हूं। जब एक ही मुद्दे पर दोनों पार्टियों ने बंद की घोषणा की है तो लगातार दो दिन बंद करने की क्या जरूरत है? सच तो यह है कि राजनेता अपने राजनैतिक फायदे के लिए यह सब कर रहे हैं।"
लेखक सुनील गंगोपाध्याय ने कहा, "इस तरह के बंद से अन्तत: जनता को ही परेशान होना पड़ता है।"
उन्होंने कहा, "इस बंद का कोई औचित्य नहीं है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ने पर आम जनता की ओर से ये लोग लड़ रहे हैं लेकिन आम जनता के लिए ही परेशानी उत्पन्न कर रहे हैं। इन लोगों ने इससे पहले भी इसी तरह के बंद की घोषणा की थी और भविष्य में भी करेंगे। इसके बावजूद ये लोग कोई समाधान नहीं निकल पाते हैं।"
फिल्म और टेलीविजन कलाकार रजत्व दत्त ने कहा, "कार और अन्य दूसरी गाड़ियों को गुरुवार और शुक्रवार को 12-12 घंटे रोकने से क्या पेट्रोल उत्पादों की कीमत को बढ़ने से रोका जा सकता है?"
उल्लेखनीय है कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा तेल की कीमत बढ़ाए जाने के विरोध में गुरुवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था, जबकि राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी तृणमूल कंग्रेस ने शुक्रवार को बंद रखने की घोषणा की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications