पेट्रोलियम की कीमतोंमें वृद्धि का मामला, लोगों के गले नहीं उतर रहे पीएम के तर्क

नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में इजाफे के पीछे कारण जरूर स्पष्ट किए हैं लेकिन उनके तर्क राजधानी के लोगों के गले नहीं उतर रहे हैं।

नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में इजाफे के पीछे कारण जरूर स्पष्ट किए हैं लेकिन उनके तर्क राजधानी के लोगों के गले नहीं उतर रहे हैं।

गरीब और मध्यवर्ग के लोगों के लिए यह समझ पाना मुश्किल है कि आखिर सरकार ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी क्यों की। उनका कहना है कि सीमित आय होने के कारण उनका परिवार इस नई मुसीबत का सामना कैसे करेगा।

गौरतलब है कि सरकार ने कल ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर क्रमश: पांच और तीन रुपये और घरेलू गैस की कीमत में 50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी कर दी थी।

मार्केटिंग कार्यकारी प्राची सिंह कहती हैं कि खाद्यान्नों और ईंधनों की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से जीवन कठिन होता जा रहा है।

सिंह कहती हैं, "प्रधानमंत्री का यह कहना कि दुनिया भर में कीमतें बढ़ने के कारण भविष्य को देखते हुए हम ऐसा करने पर मजबूर हैं। भला मैं भविष्य के बारे में कैसे सोच सकती हूं जब मेरा आज ही सुरक्षित नहीं है।"

एक सीएनजी आटो चालक बाबूदीन कहते हैं, "मैं रोज बमुश्किल 250 रुपये कमाता हूं। मेरे दो बच्चे हैं और मेरी पत्नी हमेशा बीमार रहती है। अगर मेरा आटो डीजल या पेट्रोल से चलता तो मैं तो बरबाद ही हो जाता।"

एक शिक्षक सुभाष शर्मा ने आईएएनएस से कहा, "पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से सब्जियों और खाद्यान्नों की कीमत में और उछाल आएगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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