हरियाणा में जारी है 'इज्जत के नाम पर हत्याओं' का सिलसिला

नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। हरित क्रांति का क्षेत्र रहे करनाल युवा लड़के-लड़कियों के खून से लाल हो गई। 9 मई 2008 को असंध ब्लॉक के बल्ला गांव के जसबीर व सुनीता को अपनी मर्जी से शादी करने के जुर्म में कत्ल कर दिया गया। पिछले एक महीने से इस जिले में "इज्जत के नाम पर हत्या" की यह तीसरी घटना है।

नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। हरित क्रांति का क्षेत्र रहे करनाल युवा लड़के-लड़कियों के खून से लाल हो गई। 9 मई 2008 को असंध ब्लॉक के बल्ला गांव के जसबीर व सुनीता को अपनी मर्जी से शादी करने के जुर्म में कत्ल कर दिया गया। पिछले एक महीने से इस जिले में "इज्जत के नाम पर हत्या" की यह तीसरी घटना है।

बल्ला गांव की सुनीता के अपने ही गांव के जसबीर से प्रेम संबंध थे। दोनोंे ही सवर्ण कहलाए जाने वाली जाट जाति से थे हालांकि दोनों के गोत्र अलग-अलग थे। सुनीता की मर्जी के खिलाफ उसकी शादी कर दी गई, परंतु वह उस रिश्ते को तोड़ आई व जसबीर के साथ हिमाचल चली गई। बाद में पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद सुनीता ने जिस जगह घरवालों ने उसकी शादी की थी, वहां से तलाक ले लिया व जसबीर के साथ ही रहने लगी।

पिछले डेढ़ वर्ष से दोनों हिमाचल में रह रहे थे। दोनों का अपने परिवार से भी लगातार संपर्क था। एक तरह से दोनों परिवारों ने भी इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया था। परन्तु यह समाज व जाति के उन ठेकेदारों को स्वीकार्य नहीं था, जो इस तरह की घटनाओं को परंपराओं व तथाकथित भाईचारे पर चोट समझते हैं। इसलिए इस युवा जोड़े का कत्ल करना जरूरी था ताकि आगे कोई भी युवा इस तरह का कदम न उठाए।

वारदात से पहली रात यह जोड़ा हिमाचल से वापस अपनी बहन के ससुराल मच्छरौली गांव में आकर ठहरा था, जिसकी भनक इन तथाकथित ठेकेदारों को लग गई। अगले दिन, दिन निकलने से पहले 30-35 लोगोंे ने इस युवा जोड़े को अगवा कर लिया और दोनों को कत्ल कर उन्हें दिन के 10 बजे लड़की के घर के बाहर फेंक दिया। सुनीता के पेट में 7 महीने का बच्चा पल रहा था। वह भी इन क्रूर हत्यारों के हत्थे चढ़ गया।

अपनी मनमर्जी से जीवन साथी चुनने के संवैधानिक अधिकार की कीमत सुनीता व जसबीर को अपना व अपने बच्चे का जीवन देकर चुकानी पड़ी। सभ्य कहलाए जाने वाले समाज में इस प्रकार की कबीलाई बर्बरता दिल दहलाने वाली है। तथाकथित समाज के ठेकेदार किस तरह मां-बाप पर चारों ओर से दबाव डालकर ऐसी स्थिति पैदा करवा देते हैं कि उन्हीं के हाथों से उनके बच्चों का कत्ल तक हो रहा है।

इन नौजवानों को समाज का दुश्मन घोषित कर सीधे मौत के घाट उतारा जा रहा है। कहीं अपील करने तक का मौका उनको नहीं दिया जाता। अपनी मनमर्जी से शादी करने के अधिकार व विवाह संस्था में मूलभूत परिवर्तन की आवश्यकता के लिए युवा शहादत दे रहे हैं चाहे यह अचेतन अवस्था में ही हो।

हिन्दी व अंग्रेजी के लगभग सभी अखबारों में यह मुख्य खबर रही, परन्तु किसी भी राजनैतिक दल (सीपीआई-एम को छोड़कर) ने इतनी बड़ी घटना पर कोई प्रतिक्रिया तक नहीं दी और शायद इसी निष्क्रियता के चलते निरंतर इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी व मुख्यमंत्री ने घटना का नोट तक लेना तक उचित नहीं समझा। बल्कि अधिकतर दल अपराधियों के साथ खड़े मिलते हैं।

इसी तरह की एक घटना, जिसे लेकर जनवादी महिला समिति व डीवाईएफआई ने काफी संघर्षो के बाद मनोज बबली के हत्यारों के खिलाफ हरियाणा उच्च न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी करवाए, परन्तु इस हत्याकांड का मुख्य अभियुक्त, जो कांग्रेस पार्टी का स्थानीय नेता है गंगाराज, उसे आज तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका। सरकार व पुलिस प्रशासन का यह रुख ही हत्यारों के हौसले बुलंद करता है। इतनी ह्दयविदारक घटनाओं पर राजनीतिक पार्टियों की चुप्पी व अपराधियों को संरक्षण देने के चलते इन घटनाओं की पुनरावृत्ति हो रही है।

जनवादी महिला समिति व डीवाइएफआई ने इस घटना की सूचना मिलते ही तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। जिस गांव में यह घटना घटी उसमें किसी बाहरी व्यक्ति को, इन हत्या के शिकार परिवारों से मुलाकात नहीं करने दिया जा रहा था। किसी तरह संगठन ने संपर्क स्थापित किया व 13 मई को लड़के का परिवार गांव के पंचायती ठेकेदारों से लुकता-छिपता करनाल पहुंचा, जहां प्रेस सम्मेलन आयोजित कर मीडिया को सही जानकारी दी गई।

मृतक लड़के की मां, भाई व बहन के अलावा महिला समिति की राज्य कोषाध्यक्ष बिमला हुड्डा, सदस्य सविता, नौजवान सभा के राज्य उपाध्यक्ष दयानंद पंवार एडवोकेट ने हिस्सा लिया। अगले ही दिन एस. पी. करनाल से भी संगठन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मिला तथा दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग की व पीड़ित परिवार को पुलिस सुरक्षा देने की बात की। हत्यारों की ओर से लड़के के परिवार पर से केस वापस लेने नहीं तो देख लेंगे, जैसी धमकियां दी जा रही हैं।

दोनों संगठनों ने सरकार से मांग की है कि अपराधियों को कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस प्रशासन सक्रियता दिखाए तो घटनाएं रुक सकती हैं। इस तरह के युवा जोड़ों के लिए हर जिले में सुरक्षा घर भी बनाने की जरूरत है। दोनों संगठनों ने इस घटना को लेकर राज्य भर में अभियान चलाने की रणनीति बनाई है।

(मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र 'लोकलहर' से साभार।)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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