कीमतों में वृद्धि के बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को दी सफाई

नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार आम आदमी को भूली नहीं है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थो के मूल्यों में वृद्धि आवश्यक हो गई थी क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें बेतहाशा बढ़ी है और तेल कंपनियों को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। सरकारी खजाने पर तो इसका भारी बोझ पड़ ही रहा है।

दूरदर्शन पर बीस मिनट के अपने संबोधन के दौरान मनमोहनसिंह ने कहा, "सरकार के प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए क्योंकि उसने कम से कम बोझ आम आदमी पर डालने का प्रयास किया है।"

प्रधानमंत्री ने जनता से अपील की कि वह सरकार की मजबूरियों को समझने का प्रयास करे।

संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने चार साल के शासन के दौरान सामाजिक विकास की दिशा में उठाए गए कदमों के बारे में भी आमजनता को बताया।

उन्होंने कहा, "व्यापार हमेशा एक जैसा चलता। हमें अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालना सीखना चाहिए। साथ ही ऊर्जा के उपयोग के मामले में भी हमें दक्ष व किफायती होना चाहिए।"

उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम पदार्थो की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत 135 डालर प्रति बैरल हो गई है जबकि पिछले फरवरी माह में तेल की कीमतों में वृद्धि की गई थी तो उस वक्त अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यह कीमत 67 डालर प्रति बैरल थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल कंपनियां लगातार नुकसान नहीं उठा सकती और यही चलता रहा तो उनके पास अंतर्राष्ट्रीय बाजार से तेल खरीदने और आयात करने के लिए पैसे ही नहीं बचेंगे। इसलिए कीमतों में वृद्धि आवश्यक हो गई थी।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों को सलाह दी कि वे तेल पर शुल्क व लेवी घटाकर आम आदमी को राहत दे सकते हैं। यह राष्ट्रीय हित में जरूरी है।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के चुनावी साल में प्रवेश करने का असर भी प्रधानमंत्री के भाषण में साफ दिखा। अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने अब तक जो प्रयास किए हैं उसके फलदायी परिणाम भी अब आने लगे हैं।"

उन्होंने कहा कि कोई इस सच को नकार नहीं सकता कि हम गरीबी, असमानता और रोगों को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महंगाई सिर्फ भारत में ही नहीं है। विश्व के अधिकांश देश इसके शिकार है और इसलिए भारत में भी महंगाई बढ़ी है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में खाद्यान्नों की बढ़ती कीमतों के कारण भारत भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

प्रधानमंत्री ने देश की जनता को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार समाज के समन्वित विकास के पथ पर चलती रहेगी ताकि सभी वर्गो को इसका लाभ मिल सके।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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