करिश्माई शख्सियत हैं ओबामा

वाशिंगटन, 4 जून (आईएएनएस)। अमेरिका में किसी भी प्रमुख राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के प्रथम अश्वेत उम्मीदवार बनने का गौरव पाने वाले बराक ओबामा का अब तक राजनीतिक सफर करिश्मे से भरपूर रहा है।

नवंबर में देश के सर्वोच्च पद के लिये होने वाले चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने जा रहे हैं जो उन्हें प्रथम अफ्रीकी-अमेरिकी राष्ट्रपति होने का गौरव दिलाने के साथ-साथ इतिहास की नई इबारत लिख सकते हैं।

राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल नेताओं में से वह सबसे कम उम्र के हैं और अगस्त में होने वाले डेमोक्रेटिक पार्टी के सम्मेलन में उनकी आयु महज 47 वर्ष होगी, जब वह अपनी उम्मीदवारी कबूल करेंगे।

केन्यायाई पिता और श्वेत मां की संतान ओबामा की कामयाबी की जड़े राजनीति में शुरूआती वर्षों में समायी हैं। 2000 में शिकागो में डेमोकेट्रिक पार्टी प्राइमरी में चार बार में विजयी रह चुके अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य को चुनौती देकर सुर्खियों में आए ओबामा उस समय भले ही नाकाम रहे थे, लेकिन उनके अंदाज ने उन्हें राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना डाला।

शिकागो के राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ पॉल ग्रीन ने उन्हें "अश्वेत चेहरे वाला श्वेत इंसान" करार दिया। उनका मानना था कि ओबामा उच्च आय वर्ग के गोरों के वोट हथियाने में ज्यादा कामयाब हैं। शिकागो में मिली हार ने ओबामा को जनता के करीब जाने के लिये प्रेरित किया।

2004 में सीनेट के लिये इलिनोइस से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के रूप में ओबामा को पहली बार पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करने का अभूतपूर्व अवसर मिला। अपने प्रभावशाली भाषण में ओबामा ने मध्य-वाम नीतियों की वकालत लेकिन एकता का चतुराई भरा आह्वान करते हुए देश भर के मीडिया और डेमोक्रेट्स का ध्यान बरबस अपनी ओर खींच लिया।

ओबामा के ताजा प्रचार अभियान के दौरान भी बोस्टन सम्मेलन वाली बातों की ही छाप हावी रही। उन्होंने कहा, " यहां कोई उदार या रुढ़िवादी अमेरिका नहीं, यहां सिर्फ एक ही अमेरिका है और वह यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका।"

चुनाव जीतकर उन्होंने वाशिंगटन की राह पकड़ी और उनके साथ थी युवा और स्फूर्ति से भरे युवा सलाहकारों की टीम।

जल्दी ही यह साफ हो गया कि ओबामा की निगाह अब राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पाने पर है और फरवरी 2007 में उन्होंने खुद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया।

ओबामा के ताजा प्रचार अभियान के दौरान भी बोस्टन सम्मेलन वाली बातों की ही छाप हावी रही। उन्होंने कहा, " यहां कोई उदार या रुढ़िवादी अमेरिका नहीं, यहां सिर्फ एक ही अमेरिका है और वह यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका।"

ओबामा ने बहुत व्यवस्थित ढंग से प्रचार शुरू किया और जल्द ही अपने से आगे चल रही सीनेटर हिलेरी क्लिंटन के बराबर जा पहुंचे और फिर उसके बाद धीरे-धीरे उनसे बढ़त बना ली। बस फिर क्या था उसके बाद तो ओबामा ने पलटकर नहीं देखा और वह दिनोंदिन कामयाबी की नये कीर्तिमान बनाते चले गए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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