तेल की कीमतों में वृद्धि वामदलों को विश्वास में लेकर: सरकार का दावा
नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। सरकार ने इस बात को फिर से दोहराया है कि तेल की कीमतों में वृद्धि का फैसला वामदलों के साथ विमर्श के बाद ही किया गया लेकिन वामदलों ने कीमतों में वृद्धि को अनुचित करार देते हुए सरकार पर आरोप लगाया है कि उनके वैकल्पिक प्रस्तावों पर उसने ध्यान नहीं दिया।
केंद्रीय तेल व प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा के अनुसार कीमतों में वृद्धि की घोषणा से पहले उनकी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात व कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया (भाकपा) के गुरुदास दासगुप्ता से बातचीत हुई थी।
कीमतों में वृद्धि की घोषणा के बाद पत्रकारों से बातचीत में देवड़ा ने कहा कि दोनों नेताओं को इस मामले में विश्वास में ले लिया गया था।
उधर माकपा महासचिव प्रकाश करात ने सरकार पर आरोप लगाया है कि कीमतोंे में वृद्धि से बचने के लिए वामदलों द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक प्रस्तावों पर सरकार ने उनसे कोई बातचीत नहीं की।
माकपा से जारी बयान में तेल की कीमतों में वृद्धि को अव्यावहारिक व अनुचित करार दिया गया है। पार्टी के अनुसार अगर सरकार उनके सुझावों पर अमल करती तो तेल की कीमतों में वृद्धि की जरूरत ही नहींे पड़ती।
माकपा के अनुसार यह बेहतर होता कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को राहत प्रदान करने के लिए सरकार 75 अरब रुपये के कोष की व्यवस्था करती जिससे कि तेल कंपनियों को घाटे से निपटने के लिए अनुदान देना संभव होता।
माकपा के मुताबिक अगर सरकार पेट्रोल व डीजल पर उत्पाद शुल्क में एक रुपये प्रति लीटर के बजाए 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती करती तो सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को और 120 अरब रुपये की राहत मिलती।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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