जीवन के अंतिम दिन महल में ही बिताना चाहती हैं नेपाल की पूर्व राजमाता

काठमांडू, 4 जून (आईएएनएस)। नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की 80 वर्षीय सौतेली मां और नेपाल की पूर्व राजमाता रत्ना शाह ने अपने जीवन के अखिरी दिन नारायणहिति महल स्थित महेंद्र मंजिल में ही बिताने की अनुमति देने का आग्रह किया है।

प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला की नेपाली कांग्रेस को उनके इस आग्रह से सहानुभूति है। राजमाता रत्ना शाह का इस महल से भावनात्मक जुड़ाव है। पिछले चार राजाओं के शासन के दौरान महल में रहने वाली राजमाता ने जीवन का अधिकतर समय यहीं गुजारा है।

पूर्व राजामाता युवराज महेंद्र की पत्नी के रूप में उनके पिता राजा त्रिभुवन के शासनकाल में नारायणहिति महल में आईं थी। राजा त्रिभुवन द्वारा गद्दी छोड़ने के बाद उनके पति महेंद्र नेपाल के राजा बने। राजा महेंद्र की मौत के बाद बीरेंद्र राजा बने। रत्ना शाह अपने सौतेल बेटे बीरेंद्र की राजमाता के रूप में नेपाल की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में से एक थीं।

राजमाता का जन्मदिन 2006 तक नेपाल में 'बाल दिवस' के रूप में मनाया जाता था। इस प्रथा का अंत 2007 में हुआ जब सरकार ने राजशाही के विशेषाधिकारों में कटौती शुरू कर दी।

रत्ना शाह महल में 2001 में हुए नरसंहार की घटना में जीवित बचे कुछ लोगों में शामिल हैं। इस घटना में राजा बीरेंद्र सहित नौ लोग मारे गए थे। राजमाता केवल इस कारण जिंदा बच गईं थी कि वह बीरेंद्र के पुत्र दीपेंद्र द्वारा गोलीबारी शुरू करने के पहले उस हाल से बाहर चली गईं थीं जहां राजपरिवार रात्रिभोज के लिए एकत्र था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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