नेपाल की विद्युत परियोजनाओं से दूर हो रही हैं भारतीय कंपनियां

काठमांडू, 4 जून (आईएएनएस)। शुरुआती दौर में नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं में निवेश की जल्दीबाजी दिखाने के बाद अब देश की राजनैतिक अस्थिरता को देखते हुए भारतीय कंपनियों का उत्साह ठंडा पड़ रहा है।

काठमांडू, 4 जून (आईएएनएस)। शुरुआती दौर में नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं में निवेश की जल्दीबाजी दिखाने के बाद अब देश की राजनैतिक अस्थिरता को देखते हुए भारतीय कंपनियों का उत्साह ठंडा पड़ रहा है।

एक ओर जहां 300 मेगावाट की ऊपरी करनाली परियोजना और 402 मेगावाट की अरुण-3 परियोजना को दो भारतीय कंपनियों ने हासिल किया है वहीं 600 मेगावाट की बूढ़ी गंडक परियोजना से भारतीय निवेशक दूर हो गए हैं।

सरकार ने जब इस परियोजना के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं उस समय इच्छुक 29 में से 18 कंपनियां भारत की थीं। पहली दो परियोजनाओं के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों ने भी इस बड़ी परियोजना में रुचि दिखाई थी।

इन कंपनियों में लार्सन एंड टूब्रो, केएसके एनर्जी, भीलवाड़ा एनर्जी लिमिटेड, कांटिनेंटल कंस्ट्रक्शंस और जेएसडब्ल्यू एनर्जी जैसी कंपनियां शामिल थीं। बाद में इनमें से किसी कंपनी ने उसमें अपनी रुचि नहीं दिखाई।

चीनी कंपनियों ने भी उसके लिए बोली लगाई थी लेकिन एक सरकारी समिति ने उनकी निविदा को अपात्र करार दे दिया।

सरकार द्वारा निर्णय लेने में हो रही देर के अतिरिक्त ये कंपनियां स्थानीय लोगों एवं स्वयंसेवी संगठनों द्वारा इन्हें बंद कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों की शिकार हो गईं।

गिरिजा प्रसाद कोईराला की सरकार पर इन परियोजनाओं को भारत को बेचने का आरोप लगाया गया था। गौरतलब है कि नेपाल में हालिया चुनावों में जीत दर्ज करने वाले माओवादियों ने भी कहा है कि वे राष्ट्रहित के इन मुद्दों पर सोच समझ कर ही कोई फैसला लेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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