सुरक्षित पेय जल मिलने में आनुवंशिकी से मिल सकती है मदद

वाशिंगटन, 4 जून (आईएएनएस)। आनुवंशिक विज्ञान की मदद से खासकर तीसरी दुनिया में जीवाणुओं और वायरसों से मुक्त शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है।

एक नए अध्ययन के मुताबिक आनुवंशिकी की मदद से जल में पाए जाने वाले सामान्य फफूंद को लक्षित कर उसको निष्क्रिय किया जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तकनीक की मदद से तीसरी दुनिया में जल को शुद्ध किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि यह तकनीक आरएनए व्यतिकरण (आरएनएआई) के नाम से जानी जाती है। ड्यूक प्रैट स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के क्लाउडिया गुंस्च के सहायक सारा मोरी ने कहा कि विकसित व अविकसित देशों के जल में पैथोजींस होते हैं।

शोधकर्ता मोरी के मुताबिक उनके आंकड़ों से यह जाहिर होता है कि जल में पाए जाने वाले फंगस को खास जीन की मदद से दूर कर तथा आनुवंशिकी की मदद से जल को जीवाणु व वायरसरहित कर शुद्ध किया जा सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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