प्रशासनिक सेवा में मुसलमानों की संख्या को बढ़ाने का प्रयास
नई दिल्ली , 3 जून (आईएएनएस)। प्रशासनिक सेवाओं में मुसलमानों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों के तहत भारतीय इस्लामी संस्कृति केंद्र (आईआईसीसी) गरीब मुसलमान छात्रों की आर्थिक सहायता कर रहा है।
नई दिल्ली , 3 जून (आईएएनएस)। प्रशासनिक सेवाओं में मुसलमानों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों के तहत भारतीय इस्लामी संस्कृति केंद्र (आईआईसीसी) गरीब मुसलमान छात्रों की आर्थिक सहायता कर रहा है।
भारत में मुस्लिमों की आबादी जनसंख्या का 14 प्रतिशत है लेकिन उसकी तुलना में प्रशासनिक सेवा में उनका अनुपात काफी कम है।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने आर्थिक रूप से कमजोर मुस्लिम छात्रों की कोंचिग के लिए छात्रवृत्ति की शुरूआत की है। कुछ स्वंयसेवी संस्थाओं में ने भी इस दिशा में प्रयास किया है। नई दिल्ली स्थित हमदर्द अध्ययन केंद्र प्रशासनिक सेवा परीक्षा में शामिल होने वाले मुस्लिम छात्रों को 1992 से ही मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है।
आईआईसीसी का कार्यभार संभाल रहे अवकाश प्रााप्त मेजर आबिद राशिद ने बताया कि उन्होंने 167 आवेदकों में से 20 उम्मीदवारों को आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। यह पहला साल है आईआईसीसी ने कोचिंग कार्यक्रम की शुरूआत की है। प्रत्येक अभ्यर्थी पर 83,000 रुपए व्यय किए जाएंगे।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने ढाई लाख वार्षिक से कम पारिवारिक आमदनी वाले परिवारों के छात्रों के लिए पिछले साल से ही मुफ्त कोचिंग और अन्य सुविधाओं की योजना शुरू की है।
मंत्रालय ने जयपुर, श्रीनगर और रांची जैसी जगहों पर केंद्रीय और राज्य प्रशासनिक सेवाओं के लिए कोचिंग उपलब्ध कराने वाली करीब 30 संस्थाओं को 3 करोड़ रूपए दिए हैं।
आईआईसीसी की तरह ही दिल्ली स्थित जकात फाउंडेशन इंडिया ने भी बिहार, झारखंड, उत्तर-प्रदेश, केरल और बंगाल जैसे राज्यों के 13 छात्रों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए चुना है।
राजेंद्र सच्चर समिति की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पुलिस सेवा में मुसलमान केवल 4 प्रतिशत, प्रशासनिक सेवा में 3 फीसदी और विदेश सेवा में मात्र 1.8 प्रतिशत हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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