अवैध पक्षी व्यापारियों की नजर अब उल्लू पर
नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। भारत में पक्षियों को अवैध व्यापार करने वालों ने अब उल्लू को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। भारत में पक्षियों को अवैध व्यापार करने वालों ने अब उल्लू को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस पक्षी की मांग में तेजी आई है। इन दिनों उल्लू की तीन प्रजातियां-बार्न उल्लू, गेट्र होर्नड उल्लू और यूरेशियन ईगल उल्लू की मांग बहुत अधिक है और बाजार में इनमें से प्रत्येक की कीमत तीन लाख रुपये से लेकर पांच लाख रुपये के बीच है।
आमतौर पर इन उल्लूओं को पालतू पक्षी की तरह रखा जाता है, लेकिन कुछ अपुष्ट खबरों के मुताबिक, शोध में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है।
बाम्बे नेचुरल हिस्टरी सोसाइटी (बीएनएचएस) के देवोजीत दास ने आईएएनएस को कहा, "शिकारी पक्षियों को जंगल से पकड़ते हैं और उन्हें व्यापारियों को बेच देते हैं। उसके बाद एजेंट उन्हें नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते यूरोप और मध्य पूर्व पहुंच जाते हैं।"
गौरतलब है कि भारत में 1990 में वन्यजीव(सुरक्षा) अधिनियम 1972 के तहत पक्षियों को पकड़ने और उनका व्यापार करने को गैरकानूनी करार दे दिया गया था। उसके बाद यह कारोबार गुपचुप तरीके से चलाया जा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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