करिश्मा खो रहे हैं टीआरएस प्रमुख चंद्रशेखर
हैदराबाद, 2 जून (आईएएनएस)। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख के चंद्रशेखर राव का करिश्मा आंध्रप्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र में घटता दिखाई दे रहा है। हाल में संपन्न उपचुनावों में उनकी पार्टी की हार से ऐसे ही संकेत मिल रहे है।
हैदराबाद, 2 जून (आईएएनएस)। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख के चंद्रशेखर राव का करिश्मा आंध्रप्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र में घटता दिखाई दे रहा है। हाल में संपन्न उपचुनावों में उनकी पार्टी की हार से ऐसे ही संकेत मिल रहे है।
चंद्रशेखर 29 मई को हुए उपचुनावों में पार्टी के प्रदर्शन से इतने आहत हैं कि उन्होंने नतीजे घोषित होने के बाद पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश तक दे डाली।
लोकसभा और विधानसभा चुनावों से महज साल भर पहले टीआरएस सांसदों और विधायकों से इस्तीफा दिलाने का उनका फैसला गलत साबित हुआ। पार्टी को विधानसभा में 16 में से सात सीटे जबकि लोकसभा की चार में से दो सीटे ही हासिल हो सकीं। इतना ही नहीं 10 सदस्यीय विद्रोही गुट ने असली टीआरएस होने का दावा किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रशेखर राव का जरूरत से ज्यादा विश्वास की वजह से पार्टी को चुनावों में मुंह की खानी पड़ी। उन्होंने चुनाव प्रचार में ढील दी, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी तेलुगू देशम पार्टी ने जमकर प्रचार किया।
विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रशेखर राव जनता के मन की थाह लेने में नाकाम रहे, जो बार-बार चुनाव थोपे जाने के कारण उनसे नाराज थी। उनके विरोधियों का कहना है कि क्षेत्र की तीन करोड़ जनता को कम करके आंकने और तेलंगाना भावना पर अपना एकाधिकार मानने की वजह से मिली यह हार चंद्रशेखर राव के लिये करारी चोट है।
पार्टी में उनके विरोधी इस हालत के लिए उनके गुस्सैल स्वभाव, तानाशाही रवैये, उनकी भाषा और उनके एकतरफा फैसलों को जिम्मेदार ठहराते हैं।
एक विद्रोही विधायक टी. जयप्रकाश रेड्डी का कहना है कि चंद्रशेखर राव बहुत बड़े बाजीगर हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक बाजी की खातिर तेलंगाना भावना को कुर्बान कर दिया। उन्होंने चंद्रशेखर राव से सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की सलाह देते हुए पार्टी के सातों विधायकों से तेलंगाना को पृथक राज्य का दर्जा दिलाने के लिये एकजुट होने की अपील की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**












Click it and Unblock the Notifications