म्यांमार के राहत शिविरों में रह रहे लोग भविष्य को लेकर चिंतित

लाबुत्ता (म्यांमार), 2 जून (आईएएनएस)। म्यांमार के लाबुत्ता इलाके के राहत शिविरों में रहने वाले तूफान पीड़ित अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं।

लाबुत्ता स्थित '3 माईल कैंप' (राहत शिविर) में पिछले शुक्रवार को 30 वर्षीया महिला खिन मार हतवे ने एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया। लेकिन प्रसव के दौरान राहत शिविर में चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने के कारण हतवे को समस्या आई। ऐसी कई समस्याओं से राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को जूझना पड़ रहा है।

तूफान से सबसे अधिक प्रभावित इरावदी डेल्टा शहर के बाहरी इलाके में स्थित अस्थाई कैंप में रहने वाले लोगों पर सरकार अपने घरों में लौटने का दवाब बना रही है। हतवे सरकार के इस आदेश से काफी चिंतित है। उन्होंने कहा, "मैं घर नहीं लौट सकती। तूफान में हमारा सब कुछ तबाह हो गया है।"

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार इस विनाशकारी तूफान में हतवे ने अपनी दो बेटियों और अपनी मां को भी खो दिया है। उन्होंने कहा कि विदेशी चिकित्सकों के सहयोग से ही यहां के लोग बच पाए हैं।

गौरतलब है कि लाबुत्ता में जापान से पिछले सप्ताह 23 सदस्यीय चिकित्सक दल पहुंचा है। यह दल ने यहां एक अस्थाई अस्पताल चला रहा है। इस अस्पताल में आस-पास के इलाकों से भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवा की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण विभिन्न राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की स्थिति चिंताजनक है। गौरतलब है कि लाबुत्ता में चार सरकारी राहत शिविरों में लगभग 12 हजार तूफान पीड़ितों ने आश्रय लिया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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