अनु. जनजाति के दर्ज की मांग के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं.पाटिल

नयी दिल्ली 29 नवम्बर.वार्ता. असम के गुवाहाटी में आदिवासियों कीरैली के दौरान एक छात्रा को निर्वस्त्र किए जाने की घटना पर क्षोभव्यक्त करते हुए गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने आज कहा कि कुछसमुदायों की अनुसूचित जाति का दर्जा हासिल करने की मांग परसरकार का रूख खुला है लेकिन फैसला लेने में बेहद सावधानी बरतीजाएगी1 आल आदिवासी स्टुडेंट्स एसोसिएशन आफ असम की 24 नवम्बरको हुई रैली के दौरान हिंसा भडकने से ढाई सौ से अधिक लोगघायल हो गए थे और 30 दुकानों को आग लगा दी गयी थी1 इस हिंसा के मुद्दे पर राज्यसभा में सदस्यों ने गृह मंत्री से कई सवालपूछे और एक युवती को निर्वस्त्र किए जाने की घटना की कठोर शब्दोंमें निंदा की1 सवालों के जवाब में श्री पाटिल ने माना कि जुलूस के समय पुलिसकी मौजूदगी बेहद कम थी और स्थिति को काबू में करने के लिएप्रशासन को अधिक सावधानी बरतनी चाहिये थी1 छात्रों की मांग के बारे में श्री पाटिल ने कहा कि किसी समुदाय कोअनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग को लेकर कई जगह समस्याएंपैदा हो रही हैं1 उन्होंने इस संदर्भ में जम्मू कश्मीर के गुर्जरों औरपहाडियों तथा राजस्थान में गुर्जर समुदाय की मांगों का भी उल्लेखकिया1 उन्होंने कहा कि इस तरह का दर्जा देने की एक लम्बी प्रक्रिया हैऔर इस जटिल तौर तरीके का मकसद यही है कि फैसले से सब संतुष्टहों1 उन्होंने कहा कि किसी समुदाय को अनुसूचित जाति में शामिलकरने के लिए यह जरूरी है कि राज्य सरकार रजिस्ट्रार जनरल को अपनीसिफारिश भेजे जहां से यह प्रस्ताव जनजाति आयोग और जनजातिकल्याण मंत्रालय से होकर केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने जाता है1 कौशिक समरेन्द्र जगबीर1824वार्ता

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