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UP में मजदूर का बेटा बना IAS, आखिर राहुल गांधी से है क्‍या खास कनेक्‍शन? कांग्रेस सांसद ने दी बधाई

UPSC Success Story: 'जो थक कर भी ना रुके, वही बाज़ीगर होता है, जो झुके नहीं मुश्किलों में, वही सिकंदर होता है', यह पंक्तियां उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्में विमल कुमार की कहानी को सजीव कर देती हैं। सीमित संसाधन, साधारण गरीब परिवार और संघर्षों से भरे रास्ते के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो मंज़िल खुद रास्ता बना लेती है।

यूपी के छोटे से गांव चांदेमऊ में ईंट-भट्‌ठे पर मजदूरी करने वाले रामदेव प्रजापति के बेटे विमल कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित परीक्षा में 107वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। विमल कुमार UPSC 2025 क्लियर करने वाले ऐसे अकेले कैंडिटेट हैं जिन्‍हें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने खुद बधाई देते हुए जमकर तारीफ की है।

UPSC Success Story

ईट-भट्ठे पर मजदूरी कर बेटे को पढ़ाया, बेटा बना IAS

यूपी के रामदेव प्रजापति ईट भट्टे पर मजदूरी का काम करते है और इनकी पत्‍नी सियावती देवी गृहिणी हैं। इनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं। जिनमें 30 वर्षीय विमल कुमार सबसे छोटे बेटे हैं जिन्‍होंने यूपीएससी 2025 की परीक्षा में 107वीं रैंक हासिल की है।

ईंट भट्‌ठे पर मजदूरी और बंटाई पर खेती करके रामदेव ने बेटे विमल को पढ़ाया। बेटे के आईएएस बनने की खबर सुनकर उनकी आंखें भर आईं। पूरा गांव विमल कुमार की सफलता पर जहां जश्‍न मना रहा है वहीं पिता रामदेव खुशी से फूले नहीं समा रहे।

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राहुल गांधी से विमल कुमार का क्‍या है कनेक्‍शन?

दरअसल, UPSC क्रैक करने वाले विमल कुमार रायबरेली के चांदेमऊ गांव के रहने वाले हैं और राहुल गांधी रायबरेली से सांसद हैं। राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र के नौनिहाल बेटे विमल कुमार की सफलता पद गदगद हैं। गांधी ने फोटो शेयर लिखा,

"रायबरेली के विमल कुमार को UPSC में सफलता प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई। आर्थिक और सामाजिक बाधाओं को पार कर उन्होंने मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से यह सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि पूरे रायबरेली के लिए गर्व का क्षण है और सभी युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा भी। आशा है वो पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ जनसेवा का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।"

विमल कुमार का गांव के स्‍कूल से आईएएस बनने का सफर

पांचवे प्रयास में यूपीएससी क्रैक करने वाले विमल कुमार ने बताया ग्रामीण परिवेश से आने के कारण बड़ी चुनौतियां आई लेकिन धैर्य नहीं खाेया। गांव के प्राइमरी स्कूल चांदेमऊ से शुरूआती पढ़ाई करने के बाद विमल कुमार का सलेक्‍शन जवाहर नवोदय विद्यालय, महाराजगंज में हो गया यहां दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद केरल चले गए। बाद में हायर स्‍टडीज के लिए वे दिल्ली पहुंचे, वर्ष 2020 में आईआईटी दिल्ली से बीटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

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नवोदय स्कूल में मिली आईएएस बनने की प्रेरणा

विमल कुमार को आईएएस बनने की प्रेरणा स्कूल के दिनों में ही मिल गई थी। नवोदय विद्यालय में पढ़ाई के दौरान एक बार जिले की डीएम स्कूल आई थीं। उनका व्यक्तित्व और काम करने का तरीका देखकर विमल काफी प्रभावित हुए। उसी दिन उन्होंने मन में तय कर लिया कि वे भी भविष्य में आईएएस अधिकारी बनेंगे और समाज के लिए काम करेंगे।

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बिना बड़ी कोचिंग के की तैयारी

विमल कुमार ने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने ज्यादातर तैयारी ऑनलाइन क्लास और सेल्फ स्टडी के जरिए की। उनका मानना है कि गांव में रहकर पढ़ाई करने से खर्च कम होता है और परिवार पर आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ता। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी।

चार बार असफलता के बाद मिली सफलता

यूपीएससी की तैयारी के दौरान विमल कुमार को कई बार असफलता का सामना करना पड़ा। उन्होंने 2021 से 2025 तक लगातार पांच बार परीक्षा दी। पहले चार प्रयासों में वे इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन में उनका नाम नहीं आ पाया। खासकर 2024 में इंटरव्यू में सिर्फ 12 अंकों से उनका चयन छूट गया था, जिससे उन्हें काफी निराशा हुई। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और एक बार फिर पूरी लगन से तैयारी की। आखिरकार पांचवें प्रयास में उन्हें सफलता मिली और उन्होंने 107वीं रैंक हासिल की।

विमल कुमार की सफलता का मंत्र?

विमल कुमार ने मीडिया को दिए इंटरव्‍यू में कहा, "किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए अनुशासन बेहद जरूरी होता है। नियमित पढ़ाई और समय का सही उपयोग ही सफलता की असली कुंजी है। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियां इंसान को मजबूत बनाती हैं। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो सफलता जरूर मिलती है।"

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