Vishnaram: कभी बाड़मेर में 'मजदूरी' करते थे विशनाराम, अब विदेश में पा रहे 85 लाख सालाना का पैकेज
विशनाराम राजस्थान के बाड़मेर जिले की गुड़ामालानी तहसील के गांव मंगले की बेरी के रहने वाले हैं। अपनी दो बेटियों की शादी करने अबू धाबी से अपने गांव आए हुए हैं।
यह सक्सेस स्टोरी आपको कभी हार नहीं मानने वाली बात के असल मायने बताएगी। यह ऐसे शख्स की कहानी है, जिसने अपनी किस्मत को बार-बार आजमाया।
ये अधिकांश बार फेल हुआ, मगर कभी हिम्मत नहीं हारी। नया काम सीखने की ललक कभी नहीं छोड़ी। नतीजा आज ये 85 लाख रुपए के सालाना पैकेज पर अबू धाबी में काम कर रहे हैं। नाम है विशनाराम।

विशनाराम की दो बेटियों की शादी
विशनाराम राजस्थान के बाडमेर जिले की गुड़ामालानी तहसील के गांव मंगले की बेरी के रहने वाले हैं। ये इन दिनों विदेश से अपने गांव आए हुए हैं। दो बेटियों की शादी करने। 12 जून को बेटी कृष्णा और दीपिका की शादी की है। बारात गांव मालपुरा और सोटू से आईं।
रूमा देवी ने शेयर की विशनाराम की स्टोरी
विशनाराम की बेटियों की शादी में नारी शक्ति पुरस्कार विजेता रूमा देवी ने भी शिकरत की। रूमा देवी ने अपने फेसबुक पेज पर शादी की तस्वीरें पोस्ट करते हुए विशनाराम की मजदूर से लाखों के पैकेज की कामयाबी का जिक्र किया है।
विशनाराम का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में विशनाराम ने अपनी पूरी कहानी बयां की, जो साल 1978 से शुरू होती है। उस साल गांव मंगले की बेरी के किसान गोरखाराम व जमना देवी के घर विशनाराम का जन्म हुआ। इनके एक भाई व चार बहनें हैं। विशनाराम सातवीं कक्षा में थे तब मां जमना देवी का हार्ट अटैक से निधन हो गया।
विशनाराम की शिक्षा
साल 1999 में विशनाराम बाड़मेर सरकारी कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे। तब भीनमाल से चौहटन के बीच चलने वाली एक निजी बस में कंडक्टर बन गए और कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ दी। तब से लेकर साल 2019 तक जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव देखें।
विशनाराम का अबू धाबी में 85 लाख का पैकेज
साल 2019 में अबू धाबी गए। वहां पर तेल के कुओं की खुदाई में उपकरण लगाने का काम करते हैं। बतौर, वेल हैड इंजीनियर काम करते हुए साढ़े सात लाख रुपए महीना यानी करीब 85 लाख रुपए सालाना पा रहे हैं। यह मौटा पैकेज कोई रातों-रात नहीं मिला बल्कि इसके पीछे विशनाराम के संघर्ष की ऐसी कहानी है, जिससे हर किसी को प्रेरित होना चाहिए।

हीरों की घिसाई का भी काम किया
अब वापस विश्नाराम के जीवन संघर्ष पर आते हैं। बस कंडक्टर की नौकरी छोड़ सूरत चले गए। वहां हीरों की घिसाई का काम करने लगे। मजदूरी कम मिली तो वापस बाड़मेर आकर जोधपुर से बागोड़ा (जालौर) के बीच चलने वाली चौधरी ट्रैवल्स की बस में कंडक्टर बन गए।
बर्तनों की दुकान पर काम किया
विशनाराम का बसों में कंडक्टर बनने का सिलसिला यहीं पर नहीं थमा। इसके बाद में वे बाड़मेर से नवसारी रूट की बस में कंडक्टरी करने लगे। कंडक्टरी छोड़ उड़पी कर्नाटक अपने जीजा के पास चले गए। वहां उनकी बर्तनों की दुकान पर काम करने लगे। फिर कुछ समय बाद वापस बाड़मेर आए एक रिश्तेदारी में जीजा की जीप चलाई। बोलेरो चालक भी बने।
मोबाइल की दुकान पर भी काम किया
जीप व बोलेरो चलाने के बाद मुम्बई चले गए। वहां मोबाइल की दुकान पर काम करने लगे। पैसे ठीक नहीं मिले तो बाड़मेर लौट आए। गुड़ामालानी में एसटीडी पीसीओ खोला। मोबाइल का जमाना आया तो एसटीडी पीसीओ बंद हो गया। फिर साल 2008 में गुजरात की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी का ट्रक चलाने लगे।

खुद की कार खरीदी
ट्रक चालक बनकर कुछ पैसे जोड़े और खुद की कार खरीद ली, जिसे टैक्सी के रूप में चलाने लगे। फिर बाड़मेर में कार्यरत ऑयल एंड गैस फील्ड की कंपनी प्रवीण इंडीस्ट्रीज में अपनी कार लगा दी। इसी दौरान बाड़मेर में खोदे जा रहे तेल के कुओं में लगने वाले उपकरणों की भी विश्नाराम को थोड़ी बहुत जानकारी हुई। इसी के चलते वहां कार्यरत नॉर्वे की कंपनी एकर सॉल्यूशन में सीवी भेज दिया।
जब जिंदगी में आया टर्निंग प्वाइंट
एकर सॉल्यूशन में विशनाराम को डेढ़ लाख रुपए प्रतिमाह की नौकरी मिली। यह इनकी जिंदगी का सबसे पहला टर्निंग प्वाइंट था। हालांकि थोड़े ही समय में एकर सॉल्यूशन का बाड़मेर में काम बंद हो गया तो विशनाराम की नौकरी भी चली गई। तब पुरानी जान पहचान के चलते प्रवीण इंडीस्ट्रीज में 24 हजार रुपए की नौकरी पकड़ी।
काम के अनुभव ने दिलाए रुपए
इसके बाद केन एनर्जी कंपनी में 40 हजार की पगार पर काम किया। फिर जीई ऑयल एंड गैस कंपनी में दो लाख 40 हजार रुपए महीना की नौकरी की। यहीं से काम का अच्छा खासा अनुभव होने पर अबू धाबी का वीजा लगाया और वहां ऑयल एंड गैस फील्ड में काम कर रही यूएस की कंपनी में वेल हैड इंजीनियर बने। पिछले चार साल से वहां सालाना पैकेज 85 लाख रुपए पा रहे हैं।
विशनाराम का परिवार
बाड़मेर के विशनाराम की शादी 21 साल की उम्र में गांव लुखू निवासी पैंपों देवी से हुई। इनके छह बेटियां हैं। बड़ी बेटी पप्पू की शादी हो चुकी है। दीपिका व कृष्णा की शादी अब की है। चौथे नंबर की बेटी कमला नीट की तैयारी कर रही है। पांच नंबर की बेटी शांति दसवीं में और छठे नंबर की बेटी सुशीला आठवीं में पढ़ रही है।
विशनाराम प्रतियोगी परीक्षाओं में भी हुए फेल
ऐसा नहीं है कि विशनाराम ने सरकारी नौकरियों की तैयारी नहीं की। बीए की पढ़ाई बीच में छोड़ने के बावजूद राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती की दो बार परीक्षा दी। आर्मी में भाग्य आजमाया। दोनों जगहों पर हाइट में निकाल दिए गए। पटवारी व ग्राम सेवक बनने का भी प्रयास किया। हर बार फेल हुए। पुस्तैनी जमीन में खेती भी की।












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