Success Story: मनरेगा मजदूर मां ने बेटे को बनाया वैज्ञानिक, कामयाबी पर पूरे गांव में बांटा गुड़

Subhash Verma Success story Rajasthan: सुभाष वर्मा की सक्‍सेस स्‍टोरी उन लोगों के लिए भी प्ररेणादायी है, जो परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को तरक्‍की की राह में रोड़ा मानकर हार मान जाते हैं।

राजस्‍थान के झुंझुनूं जिले के गांव पचलंगी में सुभाष वर्मा वो शख्‍स हैं, जिनको मां ने महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मजदूरी के वैज्ञानिक बना दिया है। मां अभी भी मरेगा में मजदूर करती है।

Success story in Hindi

बेटे की सफलता पर फूले नहीं समा रही मां केसरी देवी कहती है कि 24 साल पहले पति भोलाराम की मौत के बाद परिवार पालने की जिम्‍मेदारी मेरे कंधों पर आ गई थी। हालात से डरी नहीं और हिम्‍मत रखी।

केसरी देवी अनपढ़ थी, मगर पढ़ाई का महत्‍व बखूबी जानती थी। शायद यही वजह है कि बेटे सुभाष वर्मा को पढ़ाने के लिए केसरी देवी ने परात-तगारी उठाई। मजदूरी की। मनरेगा आने के बाद इसमें लग गई। वर्तमान में भी मनरेगा में ही काम कर रही हैं।

Success story of MNREGA laborer son

केसर देवी कहती हैं कि बेटे ने भी भारतीय मौसम विभाग में सहायक वैज्ञानिक बनने में काफी मेहनत की है। बेटा वर्तमान में मुम्‍बई में पोस्‍टेड है। बेटे का चयन सितम्‍बर 2023 में हुआ था। सरकारी नौकरी लगने के बाद बेटा पहली बार गांव आया तो पूरे गांव में गुड़ बांटकर खुशियां मनाई थी।

मीडिया से बातचीत में केसर देवी ने कहा कि अब सब बोलते हैं कि बेटा सरकारी नौकरी लग गया। मजदूरी छोड़ दो। इस पर जवाब होता है कि मनरेगा में मजदूरी करके ही बेटे को वैज्ञानिक बनाया है। यह काम कभी नहीं छोड़ पाऊंगी।

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