Savita Pradhan Success Story: मजदूर लड़की बनी अफसर, 'मौत' के मुंह से निकल क्रैक की सिविल सेवा परीक्षा
Savita Pradhan Gaur MPPSC Story: मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा की अफसर सविता प्रधान मंडी के आदिवासी गांव की रहने वाली है। पहले प्रयास में MPPSC पास करके अफसर बन गई।
Savita Pradham Joint Director Urban Administration: बचपन गरीबी में बीता। महुआ बीनने से लेकर बीड़ी पत्ते तोड़ने और गोबर ढोने तक का काम किया। फिर बाल विवाह का दंश झेला। दो बच्चों की मां बनी और फांसी के फंदे तक तक पहुंच गई थी।
मौत को गले लगाने वाली थी तब दिल की सुनी। मरने का मन छोड़ किताबों से दोस्ती की कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। फिर एमपीपीएससी (MPPSC) में भाग्य आजमाया और अफसर बन गई। नाम है सविता प्रधान गौर।

मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा की अफसर सविता प्रधान गौर की सक्सेस स्टोरी उन लोगों के लिए प्रेरणादायी है, जो थोड़ी मुश्किलों से ही हार मान लेते हैं जबकि सविता गौर के सामने तो खुदकुशी कर लेने जैसे हालात बन गए थे।
सविता प्रधान गौर मध्य प्रदेश के मंडी इलाके के आदिवासी गांव की रहने वाली है। अपने गांव से दसवीं पास करने वाली पहली लड़की व पहली एमपीएएस अफसर है। वर्तमान में ग्वालियर संभाग में संयुक्त निदेशक नगरीय प्रशासन पद पर सेवाएं दे रही हैं।
एक इंटरव्यू में सविता प्रधान गौर ने बताया कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती थी, मगर परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। माता-पिता के साथ खुद को भी मजदूरी करनी पड़ती थी। महज 17 साल की उम्र में सविता की उसकी मर्जी के बिना शादी कर दी गई।

सविता के अनुसार शादी के कुछ समय तक तो ठीक रहा, मगर फिर प्रताड़ना शुरू हो गई। पति व ससुराल वाले छोटी-छोटी बातों को लेकर तंग परेशान करने लगे। हाथ भी उठा लेते थे। इस बीच सविता दो बच्चों की मां बन चुकी थी।
दुखभरी जिंदगी से तंग आकर सविता ने एक रोज जान देने की ठानी। अपने दोनों बच्चों को कमरे में सुलाया। दोनों को खूब लाड-दुलार किया और फिर पंखे के हुक से साड़ी का फंदा डालकर आत्महत्या करने वाली थी। इसी दौरान सविता की सास ने उसे यह सब करते खिड़की से देख लिया। तब सविता का ध्यान भटका और उसने मरने का इरादा छोड़ दिया।
सविता के अनुसार आत्महत्या की कोशिश के बाद उसने तय किया वह अपने बच्चों के साथ बाकी जिंदगी बिताएगी। ऐसे में वह ससुराल छोड़कर अपने बच्चों के साथ एक रिश्तेदार के पास चली। फिर लोगों से आर्थिक मदद पाकर व ब्यूटी पार्लर में काम करके कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। फिर साल 2005 में पहले ही प्रयास में एमपीपीएससी पास करके अफसर बन गईं।

सविता प्रधान गौर वर्तमान में सिंगल मदर अपने दोनों बेटों के साथ जिंदगी बीता रही हैं। इनके बेटे का नाम अथर्व व यजूस है। 2014 में सविता गौर को पदोन्नति मिली। सविता प्रधान अपने यूट्यूब चैनल पर हिम्मत वाली लड़कियां शीर्षक से वीडियो बनाकर समाज में बदलाव लाने का प्रयास भी कर रही हैं। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान एक बार तो ऐसा अवसर भी आया कि घर खर्च चलाने के लिए सविता गौर को अपनी मां के गहने भी बेचने पड़े थे।












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