12 घंटे की नौकरी और सिर पर UPSC का जुनून, 5 बार फेल होने पर भी नहीं टूटा हौसला... ऐसे क्रैक किया एग्जाम
Paramita Malakar success story: सिविल सर्वेसेज की परीक्षा क्रैक करना हजारों लोगों का सपना है। एक ऐसा जुनून है, जिसे हकीकत में बदलने के लिए लोग अपने दिन-रात एक कर देते हैं। ऐसा ही जुनून मन में लिये परमिता मालाकार भी निकली थीं। वही परमिता, जिन्होंने साल 2023 के यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम को क्रैक किया था। परमिता की कहानी ऐसी है, जो हजारों, लाखों लोगों के लिए किसी प्रेरणा से कम बिल्कुल भी नहीं है।
सिर पर था यूपीएससी का जुनून
12 घंटे की नौकरी के साथ वक्त निकालकर अपने सपने के पीछे दौड़ना... ये बस वही इंसान कर सकता है, जिसके मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो। बस यही बात परमिता को औरों से एकदम अलग बनाती है। जी हां! सिविल सर्विसेज परीक्षा के लिए परमिता को बेहद कम वक्त मिल पाता था और इसकी वजह उनकी 12 घंटे की नौकरी थी।

12 घंटे की नौकरी के साथ की पढ़ाई
साल 2018 से परमिता यूपीएससी की तैयारी शुरू करने लगीं। इंडियन मास्टर माइंड्स को उन्होंने बताया कि टीसीएस में 12 घंटे की नौकरी के साथ उन्होंने पढ़ाई भी की। पढ़ाई के लिए काफी कम ही समय मिल पाता था और यही वजह रही कि अपने पहले प्रयास में वे असफल हो गईं। इसके बाद लगातार पांच प्रयासों में भी परमिता के हाथ असफलता ही लगी।
कड़ी मेहनत से पाया मुकाम
मगर इस असफलता ने परमिता के हौसलों को डगमगाने नहीं दिया। परमिता 30 साल की थीं, जब उन्होंने एलआईसी, बैंक पीओ, रेलवे और पश्चिम बंगाल लोक सेवा आयोग की अलग-अलग भर्तियों की परीक्षाएं देनी शुरू कर दी। इस दौरान कड़ी मेहनत के बाद परमिता को एसडीआईसीओ का पद मिला। न सिर्फ ये कामयाबी बल्कि सिविल सेवा प्रीलिम्स और मेन पास करने की कामयाबी भी उनके हाथ लगी।
कैसे क्रैक किया कठिन एग्जाम?
इसके बाद फाइनली साल 2023 में परमिता ने यूपीएससी का कठिन एग्जाम क्रैक किया। परमिता के सामने कॉर्पोरेट नौकरी के साथ सीमित वक्त में पढ़ाई करने का प्रेशर था। ऐसे में उन्होंने साल 2022 की अपनी तैयारी में यूपीएससी के पुराने प्रश्नों को हल करने पर फोकस किया। ऐसे में वे UPSC प्रीलिम्स क्रैक करने में सफल रहीं।
खुद पर होने लगा था शक मगर...
बताते चलें कि अपने छठे प्रयास में 16 अप्रैल साल 2024 को मेरिट लिस्ट में परमिता ने अपना नाम देखा तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परमिता ने देशभर में 812 वीं रैंक हासिल की थी। इससे पहले लगातार 5 बार असफलताओं ने उन्हें खुद पर शक करने पर मजबूर कर दिया था। परमिता ने बताया कि लगातार नौकरी बदलने की वजह से पढ़ाई का समय काफी सीमित हो गया था मगर इसके बाद साल 2022 में जब उन्होंने अपनी रणनीति बदली तो ये उनके लिए एक गेम चेंजर साबित हुई।
गेम चेंजर साबित हुआ एक फैसला
परमिता ने हमेशा से सेल्फ स्टडी पर ही भरोसा जताया है। मगर उन्होंने साल 2023 में मेन परीक्षा के लिए कोलकाता के एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने कुछ मॉक टेस्ट दिये। परमिता ने कुल 28 मॉक टेस्ट दिये। यही बात उनके लिए गेम चेंजर साबित हुई। इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा 812वीं रैंक के साथ पास की।












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