कुछ इस तरह से NRI मुस्लिम महिला गाय के जरिए लोगों को मुहैया करा रही हैं रोजगार

नई दिल्ली। अक्सर गो रक्षा के नाम पर आपने हिंसा की खबरें सुनी होंगी, लेकिन गो सेवा का जबरदस्त उदाहरण एक मुस्लिम महिला ने दिया है। अमेरिका के टेक्सास से वापस लौटी एनआरआई गुजारती मुस्लिम महिला मर्जिया मूसा गो सेवा के क्षेत्र में काफी सुर्खियां बटोर रही हैं। वह अपने प्रयासों के जरिए लोगों को बता रही हैं कि आखिर कैसे असल मायनों में गो सेवा की जाती है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि मर्जिया बहुत ही आराम का जीवन अमेरिका में बिा रही थी, लेकिन उनके भीतर हमेशा से यह इच्छा थी कि वह बनासकाठा स्थित अपने गांव कनोदर के लिए कुछ करें। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक मर्जिया अमेरिका से वापस आकर गुजरात के गांव में डेयरी चला रही हैं।

2016 में 2.5 करोड़ रुपए से शुरू की डेयरी

2016 में 2.5 करोड़ रुपए से शुरू की डेयरी

मर्जिया की यही ख्वाहिश उन्हें वापस उनके गांव खींच लाई और उन्होंने अपने गांव में डेयरी खोलने का फैसला लिया। उन्होंने पांच एकड़ की जमीन पर नवंबर 2016 में डेयरी को खोला और यहां 22 गाय पाली। इसपर शुरुआती खर्च 2.50 करोड़ रुपए आया, लेकिन अब उनके पास 120 होल्सटेन फ्रेसियन नस्ल की गाय हैं, जोकि मुख्य रूप से नीदरलैंड में पाई जाती हैं। मर्जिया मूसा बताती हैं कि मैं टेक्सास में घर बदलवानें के बिजनेस में थी, जहां लोगों के घर की मरम्मत करवाई जाती थी और फिर उसे लोगों को बेच दिया जाता था। लेकिन फिर मैंने फैसला लिया कि मैं अपने देश के लिए कुछ करना चाहती हूं।

ऐसे की थी शुरुआत

ऐसे की थी शुरुआत

मर्जिया मूसा के दो बच्चे हैं जोकि अमेरिका में ही रहते हैं। मर्जिया ने बताया कि शुरुआत में मैंने अपने गांव में डेयरी को खोला और गांव की तीन महिलाओं को दूध से बने उत्पाद बांटने के लिए रखा, वह गाय की देखरेख भी करती थीं। लेकिन नोटबंदी के बाद बड़ी संख्या में लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा था। मूसा बताती हैं कि हमे कुछ मुश्किल का भी सामना करना पड़ रहा था, जब मेरा स्टाफ गाय को गाड़ी में लेकर आ रहा था कुछ गो रक्षको ने उन्हें रोक लिया था, लेकिन मैंने पुलिस को मदद के लिए फोन किया, जिसकी वजह से कुछ खास दिक्कत नहीं हुई।

लोगों को करती हैं जागरूक

लोगों को करती हैं जागरूक

यही नहीं वर्ष 2017 में आई बाढ़ ने थोड़ी मुश्किल को और बढ़ा दिया, जिसकी वजह से गाय और उनके बछड़े मर गए थे। हमारी डेयरी पानी में डूब गई थी। जिसके बाद हमे फिर से फार्म को साफ करने में काफी दिन लग गए। इस काम में स्थानीय लोगों ने हमारी काफी मदद की, जिसके बाद हम फिर से काम को उसी रफ्तार में करने लगे थे। इसके अलावा मूसा ने लोगों को जागरूक करने का भी काम शुरू किया कि कैसे वह अपने जानवरों की देखरेख करें। मूसा हर गाय पर 250 रुपए खर्च करती हैं और औसतन हर गाय 14 लीटर दूध हर रोज देती है। वह हर महीने तकरीबन 2 लाख रुपए इससे कमा लेती हैं। वह गांय से जुड़े तमाम औषधीय उत्पाद और घी बेचती हैं।

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