Mona Lisa Bal: दोस्त के संघर्ष से बदली जिंदगी, महिलाओं व 'स्पेशल' बच्चों के जीवन में फैला रहीं ज्ञान का प्रकाश
मोनालिसा बाल एक ऐसी किवदंती हैं जो शिक्षिका के पेशे में होकर लैंगिक पक्षपात के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए हैं। इन्होंने एक ऐसा राष्ट्र बनाने का मिशन शुरू किया है जहां पुरुषों और महिलाओंको बराबर मौके मिलें।

Mona Lisa Bal शिक्षिका हैं। भारत में शिक्षकों को भावी पीढ़ी का निर्माता कहा जाता है। बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाले टीचर कई बार अपनी इच्छाशक्ति के कारण भी मिसाल कायम करते हैं। मोना लिसा बाल ऐसी ही जीनियस हैं जिनकी कहानी निम्न-मध्यम वर्ग से जुड़ी होने के कारण बड़े पैमाने पर लोगों को प्रेरित करती है। बदलते दौर में नारी शक्ति ऐसे इंस्पायरिंग काम कर रही है, जिनसे प्रेरणा हासिल कर हम भी जीवन में सफल हो सकते हैं। आधी-आबादी ने अपने कौशल से ऐसे कीर्तिमान रचे हैं कि दुनिया अचंभित रह गई। जानिए मोना लिसा बाल की मोटिवेशनल स्टोरी

नारी तू नारायणी... सबको बराबर मौके...
दरअसल, महिलाएं 'कमजोर' हैं, ये धारणा अनादिकाल से बरकरार है, लेकिन अब समाज में कई महिलाएं ऐसी हैं जो पुरुषों के बराबर आ चुकी हैं। महिला दिवस पर KIIT इंटरनेशनल स्कूल की चेयरपर्सन डॉ. मोनालिसा बाल को जानना दिलचस्प है। ऐसा इसलिए क्योंकि मोनालिसा शिक्षा के प्रति जुनूनी रही हैं। उन्होंने देश में महिला-पुरुष भेद खत्म करने के लिए विशेष रूप से सक्षम छात्रों (specially-abled students) को मुख्यधारा के स्कूलों में शिक्षा प्रदान करने की पहल शुरू की। SEN Globe नाम की ये पहल सबको बराबर मौके मिलें, इस पर फोकस करती है।

बचपन कैसे बीता, बड़े होने पर क्या बदला
अपने करियर की शुरुआत में मोनालिसा को पुरुष प्रधान समाज में अलग पहचान बनाना बहुत मुश्किल लगता था। उन्होंने समावेशी बनने का प्रयास शुरू किया। KIIT इंटरनेशनल स्कूल में पहले पुरुषों और महिला कर्मचारियों का अनुपात ठीक किया गया। इसके बाद बारी आई बच्चों के लिए कुछ करने की। बचपन के विश्वास और अत्यधिक शिक्षित होने का दृढ़ संकल्प रखने वाली मोनालिसा के बारे में एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार वे अपने दो भाई-बहनों के साथ कोलकाता में पली-बढ़ीं। अधिकांश जीवन मध्यवर्गीय महिलाओं के बीच रहा, ऐसे में उन्हें भी लगा कि लाइफ अधिकांश दोस्तों जैसी ही रहेगी। परिवार उनकी पहली प्राथमिकता होगी और उन्हें शानदार 'होम मेकर' बनना होगा।

परिवार के समर्थन से खूब पढ़ीं मोनालिसा
मोनालिसा के ससुराल वाले ओडिशा में बहुत प्रसिद्ध और सम्मानित परिवार से आते थे। आदर्शवाद के साथ सामाजिक चेतना वाली फैमिली मोनालिसा के लिए बिल्कुल नया अनुभव था। 21 वर्षीय मोनालिसा को एहसास हुआ कि केवल पैसे से सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान नहीं मिलते। ससुराल के मददगार परिजनों और प्यार करने वाले पति के प्रोत्साहन का नतीजा हुआ कि मोनालिसा ने शादी के बाद राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की। KIIT से MBA करने वाली मोनालिसा ने घर में दो छोटे बच्चों के बावजूद शानदार तरीके से चीजों को मैनेज किया और पीएचडी की डिग्री भी हासिल की।

दोस्त के संघर्ष से खुली आंखें
समय बीतने के साथ, मोनालिसा ने महसूस किया कि ज्यादातर महिलाएं इतनी भाग्यशाली नहीं होतीं। ग्रैजुएशन-पीजी और फिर पीएचडी जैसी पढ़ाई के लिए परिवार का समर्थन सभी महिलाओं को नहीं मिलता। इसी समय उनके मन में ख्याल आया कि इस अंतर को पाटने की सख्त जरूरत है, और बदलाव की शुरुआत उन्हें खुद करनी चाहिए। कुछ साल बाद कुछ ऐसा हुआ जिसने उनका पूरा नजरिया ही बदल दिया। उसकी सहेली गार्गी के बच्चे उसके अपने बच्चों की उम्र के थे, लेकिन गार्गी का बड़ा बेटा ज़ैन 15 साल की आयु में ल्यूकेमिया का शिकार हो गया। डॉक्टर बचाने में कामयाब नहीं रहे। गार्गी का छोटा बेटा, रेहान 18 साल की आयु में ऑटिस्टिक हुआ। हालांकि, इसकी प्रतिभा अद्भुत है।

स्पेशल एजुकेशन नीड (SEN) अनूठी मुहिम
इसके बाद रेहान को पालने के लिए गार्गी के संघर्ष को देखकर मोनालिसा की आँखें खुल गईं। उसने महसूस किया कि ऑटिज्म और ऐसे ही 'स्पेशल' बच्चों के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों और सहानुभूति के माहौल की सख्त जरूरत है। इसी सोच से KiiT SENGlobe की शुरुआत हुई। आज यह स्कूल 'एसईएन' (स्पेशल एजुकेशन नीड) की अनूठी मुहिम चला रही है। इसमें 70 से अधिक छात्र और प्रशिक्षित शिक्षकों का एक पूल है। बच्चों में जरूरी कौशल विकास के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा में स्थापित किया जाता है। यहां से पढ़े बच्चे सम्मानजनक और तनाव मुक्त तरीके से जीवन यापन करते हैं। मोनालिसा को एक और बात खास बनाती है। उन्होंने मुहिम केवल 'स्पेशल' बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक ही सीमित नहीं रखा। उन्होंने स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति समझ और सम्मान को भी बढ़ावा दिया।

एशिया के हम सिकंदर, आसमां है हद हमारी..
छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक गणित और इसके आधार पर वैदिक मेमोरी लैब की पहल की गई है। दृढ़ विश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ स्थापित लैब का मकसद नंबर के क्षेत्र में बच्चों का कौशल विकास है। उन्होंने 'इंस्पिरॉन' (Inspiron) नाम का आउटरीच प्रोग्राम भी शुरू किया है। जो स्कूल का मानवतावादी आउटरीच प्रोग्राम है। आस-पास के गांवों में महिलाओं और बच्चियों क पीने का साफ पानी, टेक्नोलॉजी तक उनकी पहुंच के साथ-साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूक किया जाता है।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल
मोनालिसा ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, KIIT इंटरनेशनल स्कूल में नेतृत्व के अधिकांश पदों (लगभग 80%) का प्रभार महिलाओं को सौंप दिया है। इसके अलावा स्कूल में काम करने वाले सभी लोगों के लिए सुरक्षित खेल का मैदान भी सुनिश्चित किया गया है। सुरक्षा गार्ड सहित अधिकांश कर्मचारी महिलाएं हैं। उन्हें अंग्रेजी बोलने की ट्रेनिंग दी गई है। छात्रों और अभिभावकों के साथ संवाद के समय ये महिलाएं पूरे कॉन्फिडेंस के साथ बातें करती हैं। डिजिटल साक्षरता का कौशल बेहतर विकल्पों की योजना बनाने में सक्षम बनाता है।

महिलाओं के लिए काम का सही समय
इसके अलावा मोनालिसा की लीडरशिप में KISS 30 हजार आदिवासी छात्रों के लिए एक स्कूल के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है। सिविल सेवा का सपना देखने वाले आदिवासी छात्रों को सलाह दी जाती है। मोना का मानना है कि महिलाएं मल्टीटास्किंग में विशेषज्ञ हैं। वे अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन को आसानी से मैनेज कर सकती हैं। इसलिए उनका मकसद ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है जहां बिना किसी पक्षपात के शिक्षा दी जाए। वह यह भी मानती हैं कि 'महिलाएं त्याग की मूर्ति' धारणा बदलनी पड़ेगी। उन्होंने कहा, आधी आबादी की सफलता के लिए काम करने का यही सही समय है।












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