IAS Mala srivastava: रायबरेली DM की हैं दो बच्चियां फिर भी नहीं ली साल भर से एक भी छुट्टी, जानें इनके बारे में

Ias Mala srivastava: रायबरेली डीएम दो छोटी बेटियों की मां हैं फिर भी एक साल से नहीं ली छुट्टी, विदेश तक में हो चुकी है तारीफ

IAS माला श्रीवास्‍तव अपनी अपनी अनोखी कार्यशैली और दरियादिली के लिए जानी जाती हैं। माला श्रीवास्‍तव ने डीएम कुर्सी पर रहते हुए ऐसी कुछ पहल की जिसकी चर्चा विदेश तक में हो चुकी है।

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आपको जानकार हैरानी होगी कि रायबरेली डीएम की कुर्सी संभालते हुए IAS माला श्रीवास्‍तव को पूरे एक साल हो चुके हैं लेकिन उन्‍होंने आज तक एक भी छुटृी नहीं ली। जबकि माला श्रीवास्‍तव दो छोटी बच्चियों की मां हैं। आदर्श आईएएस अधिकारी की छवि रखने वाली रायबरेली डीएम माला श्रीवास्‍तव से वनइंडिया ने एक्‍सक्‍लूसिव इंटरव्‍यू में बातचीज की। आइए जानते हैं इनके बारे में...

बच्‍चे संभालते हुए पूरी शिद्दत से निभा रहीं डीएम की जिम्‍मेदारी

परिवार-बच्‍चे परिवार संभालते हुए माला श्रीवास्‍तव हर दुखियारे का दर्द सुनने और उसका हल करने के लिए आसानी से उपलब्ध रहती हैं। जब से माला श्रीवास्‍तव ने रायबरेली डीएम की कुर्सी संभाली है डीएम कार्यालय के दरवाजे आम जनता के लिए हमेशा खुले रहते हैं।

बेंन ट्यूमर से बीमार बच्‍ची का अपनी सैलरी से करवाया था इलाज

ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी का इलाज करवाने से लेकर बेघरो को घर दिलाने समेत अन्‍य ऐसे असंख्‍य काम IAS माला ने किए हैं जिसकी वजह से वो हर किसी को अपनी लगती हैं। IAS माला ने कंचन नाम की बच्‍ची के ब्रेन ट्यूमर के इलाज अपने सैलरी के पैसे से करवाया था।

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डीएम को कोई बना लेता है 'बेटी' तो कोई 'दीदी'

डीएम कार्यालय आने वाला हर फरियादी डीएम माला के अपनत्‍व से प्रभावित होकर कभी उन्‍हें अपनी बिटिया कहकर उन पर आर्शीवाद की बरसात कर देते हैं तो कोई उन्‍हें अपनी दीदी कहकर उनके पैर छूकर आर्शीवाद लेते नजर आता है। वहीं जो बच्‍चे आते हैं उन्‍हें टाफी-बिस्‍कुल देकर माला उनकी फेवरेट मैम या आंटी बन जाती हैं।

हर दिन सुनती हैं लोगों की समस्‍याएं

रायबरेली डीएम माला श्रीवास्‍तव ने वन इंडिया से बातचीत करते हुए बताया कि वो हर दिन अपने कार्यालय में सुबह एक घंटे बैठती हैं और जिले के लोगों की समस्‍याओं को सुनती हूं। हर दिन में उनके पास 90 से 100 फरियादी अपनी समस्‍या को लेकर आते हैं।

सीएम योगी की सुरक्षा के लिए लगा दी थी दौड़

IAS माला श्रीवास्‍तव वो ही अधिकारी हैं जब वो बहराइच की डीएम थी तब वो उनके शहर पहुंचे सीएम आदित्‍यनाथ की सुरक्षा के लिए हैलीपैड तक तेज दौड़ लगाते हुए देखा गया था।

जानें क्‍या था पूरा मामला

ये वाकया 24 अगस्त 2022 का है जब सीएम योगी की सुरक्षा के लिए बहराइच डीएम माला श्रीवास्‍वत को दौड़ता हुआ देखा गया था। बहराइच डीएम का दौड़ लगाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। दरअसल, सीएम योगी की सेफ्टी प्रोटोकॉल फॉलो करते हुए सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए डीएम माला हैलीपैड पर दौड़ लगाती हुई नजर आईं थीं।

'विद्या दान' योजना शुरू किया तो विदेश तक में हुई तारीफ

माला श्रीवास्‍तव जब बहराइच की डीएम थी तब उन्‍होंने सरकारी स्‍कूलों की हालत सुधारने के लिए प्राथमिक विद्यालयों में विद्या दान जैसी योजना की शुरूआत की थी जिसके अंतर्गत सरकारी विभागों में कार्यरत अधिकारियों हो सप्‍ताह में कम से कम 1 घंटा सरकारी स्‍कूलों में पढ़ाने का आदेश दिया था। जिसका परिणाम ये हुआ था कि सरकारी स्‍कूलों का कायाकल्‍प हो गया। माला श्रीवास्‍वत की 'विद्या दान' योजना की पहल के बाद इसे अन्‍य जिलों में लागू किया गया और डीएम माला श्रीवास्‍तव की इसके लिए तारीफ विदेश तक में हुई।

खड़े- खड़े दो अधिकारियों को कर दिया था संस्‍पेंड

माला श्रीवास्‍तव ने रायबरेली में प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई करते हुए खड़े-खड़े ग्राम विकास अधिकारियों के सस्पेंड कर दिया था।

हैदराबाद की रहने वाली माला श्रीवास्‍तव ने की है इंजीनियरिंग

हैदराबाद की रहने वाली माला श्रीवास्‍तव के पिता भी प्रशासनिक अधिकारी थे और मां हाईकोर्ट काउंसर थीं। माला श्रीवास्‍तव ने कम्‍यूटर सांइस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। माला श्रीवास्‍तव ने आईएएस परीक्षा क्‍लीयर करने से पहले प्राइवेट फर्म में नौकरी भी की है। IAS बनने का निर्णय उनका खुद का था।

Ias Mala srivastava का करियर

IAS बनने का सपना पूरा करने के लिए माला श्रीवास्‍तव ने खूब मेहनत की और UPSC 2009 की परीक्षा में सफलता हासिल कर आईएसए बनीं। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद माला की 2014 में पहली पोस्टिंग उन्‍हें यूपी के औरेया में मिली। इसके बाद 2018 में बहराइच की डीएम बनी और इसके बाद 2019 में बस्‍ती डीएम बनीं। अप्रैल, 2022 में डीएम के तौर पर आईएएस माला श्रीवास्‍तव ने रायबरेली की कमान अपने हाथों में ली और जिले का काया-कल्प ही कर दिया है।

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