Shrikunj: मां को पढ़ना नहीं आता, 13 साल का वर्ल्ड रिकॉर्डधारी सपूत 'श्रीकुंज' से सुनाएगा खबरें! लोकार्पण जल्द
Shrikunj News Paper आने वाले समय में खबरों और अखबारों को पढ़ने का आपका अनुभव पूरी तरह बदल सकता है। हरियाणा के 13 साल के जीनियस ने इसे डेवलप किया है। जानिए कमाल की सक्सेस स्टोरी

अगर आपके घरों में रहने वाले बड़े-बुजुर्ग पढ़ना-लिखना नहीं जानते तो आप इनकी हेल्प के लिए क्या कर सकते हैं? एक 13 साल के बच्चे ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसपर न केवल परिवार को बल्कि प्रदेश और पूरे देश को नाज है।
कार्तिक ने श्रीकुंज अखबार डिजाइन किया
हरियाणा का होनहार किशोर न केवल वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक है, बल्कि 13 साल की आयु में इसने ऐसा अखबार बनाया है, जिसकी खबरों को सुना जा सकेगा। अगस्त, 2022 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम करने वाले कार्तिक ने श्रीकुंज डिजिटल अखबार डिजाइन किया है।
13 साल के जीनियस का कमाल
कार्तिक कितने काबिल हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल 13 साल के इस किशोर ने आर्टिफिशियस इंटेलीजेंस (AI), ग्राफिक डिजाइनिंग और कंप्यूटर कोडिंग का ज्ञान हासिल किया है।
ग्राफिक डिजाइन पर किताब लिखी
रिपोर्ट्स के अनुसार कार्तिक दो किताबें भी लिख चुके हैं। इन्होंने दी कोडिंग वर्ल्ड और दी वर्ल्ड ऑफ ग्राफिक डिजाइन टाइटल वाली किताबें प्रकाशित करा चुके हैं। लॉकडाउन के दौरान कुछ अनोखा करने की प्रेरणा मिली।

मां को पढ़ना नहीं आता
हरियाणा के झज्जर जिले में एक गांव में रहने वाले कार्तिक बताते हैं कि उनकी मां को पढ़ना नहीं आता। ऐसे में उसने सोचा कि कैसे उनको खबरें दिखाई जा सकती हैं। इसी बीज से निकले पौधे का नाम श्रीकुंज डिजिटल अखबार है।
25 अप्रैल को श्रीकुंज की शुरुआत
बकौल कार्तिक, उन्होंने अपनी इस अनोखी रिसर्च को पेटेंट भी करा लिया है। मां के प्रति श्रद्धा ऐसी कि बोलने वाले अखबार श्रीकुंज का लोकार्पण भी मां के हाथों से ही होगा। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार 25 अप्रैल को श्रीकुंज की शुरुआत हो जाएगी।
इस फॉर्मूले पर सुना जा सकेगा अखबार
9वीं कक्षा में पढ़ने वाले कार्तिक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में माहिर हैं। इन्होंने बताया है कि कई अखबारों को इस इनोवेटिव फॉर्मूले पर सुना जा सकता है, लेकिन फिलहाल इनका इरादा श्रीकुंज पर फोकस करने का है।

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YouTube से सीखी AI टेक्नोलॉजी
कमाल का दूरदर्शी और भविष्य के आधार पर इनोवेशन करने वाले कार्तिक को पूरी उम्मीद है कि इस फ्यूचर टेक्नोलॉजी से कम पढ़े लिखे या बुजुर्ग लोगों को काफी मदद मिलेगी। उन्होंने यू-ट्यूब वीडियो देखकर AI की बारीकियां सीखीं।
10वीं पास पिता का सपोर्ट
होनहार किशोर के पिता पेशे से किसान हैं। केवल 10वीं पास हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक के प्रति कार्तिक के विजन को उनका पूरा समर्थन मिलता है। एशिया के सबसे युवा ऐप डेवलपर कार्तिक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रखते हैं।
हरियाणा से हार्वर्ड तक का सफर
कार्तिक का कमाल ऐसा है कि हरियाणा के इस किशोर का हार्वड भी मुरीद हो गया है। इनके टैलेंट को देखते हुए हार्वर्ड ने कंप्यूटर एप्लिकेशन में ऑनलाइन कोर्स (B.Sc) का ऑफर दिया है। इन्हें स्कॉलरशिप भी मिली है।

टेक्नोलॉजी में माहिर कैसे बन गए
कार्तिक के इस सफर की शुरुआत कोरोना महामारी के दौरान हुई। स्मार्टक्लास के दौरान उसका फोन खराब हो गया। ऑनलाइन वीडियो की मदद से उसने फोन ठीक कर लिया। इसके बाद उसकी रूचि बढ़ी।
एक साल पहले गिनीज में दर्ज हुआ नाम
सीखने की इस अवधि में कार्तिक ने तीन लर्निंग एप डेवलप कर डाले। इस उपलब्धि को हासिल करने वाले 12 साल सात महीने और सात दिन के किशोर कार्तिक को 20 अप्रैल 2022 को गिनीज का खिताब मिला।
कितने पैसे में पढ़ाई
इतनी छोटी आयु में 45 हजार बच्चों के पढ़ने का इंतजाम करने वाले कार्तिक बताते हैं कि उनका मकसद सस्ती दरों पर जरूरतमंद बच्चों के लिए शिक्षा के साधन का इंतजाम करना है। लर्निंग एप में नर्सरी से पांचवीं तक की पढ़ाई के लिए 500 रुपये देने होते हैं।

CM दे चुके हैं शुभकामनाएं
छठी से 12वीं के बच्चों को कार्तिक के लर्निंग एप पर एक हजार रुपये का भुगतान करना होता है। वे बताते हैं कि सरकार से सहयोग मिलने पर मदद का दायरा बढ़ाया जा सकता है। गिनीज रिकॉर्ड बनने पर सीएम खट्टर ने भी शुभकामनाएं दी थीं।












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