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72 वर्ष की उम्र में अपना सपना पूरा करने स्कूल पढ़ने पहुंचे मुकुंद चारी

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    मुंबई। कहते हैं अगर आपके भीतर कुछ कर गुजरने की ललक हो तो फिर आपके हौसले के आगे हर बाधा छोटी लगती है। कुछ इसी जबरदस्त हौसले की मिसाल महाराष्ट्र के सेंट जेवियर नाइट स्कूल में देखने को मिला है। जहां 72 वर्षीय मुकुंद चारी अपने सपने को सच करने के लिए एक बार फिर से स्कूल पहुंच गए हैं। दरअसल मुकुंद अंग्रेजी साहित्य में डिग्री हासिल करना चाहते थे, लेकिन इस सपने को वह पूरा नहीं कर सके, लिहाजा एक बार फिर से 72 वर्ष की उम्र में उन्होंने स्कूल में कक्षा 7 में दाखिला लिया है।

    बचपन में नहीं पूरा हो पाया सपना

    मुकुंद चारी ने दो महीने पहले ही स्कूल में दाखिला लिया है। देश की आजादी से चार दिन पहले पैदा हुए मुकुंद ग्रांट रोड स्थित घर में रहते हैं, वह नीरा कॉ-ऑपरेटिव सोसाइटी में गार्ड की नौकरी करते थे, जहां से वह रिटायर हो गए हैं। तकरीबन 30 साल की नौकरी के बाद वह यहां से रिटायर हो गए थे। उन्होंने 1950 में मराठी माध्यम से अपनी पढ़ाई की थी। लेकिन उस वक्त वह अग्रेजी साहित्य में डिग्री हासिल करने का अपना सपना पूरा नहीं कर सके थे।

    11वीं तक की थी पढ़ाई
    उम्र के इस पड़ाव में वापस फिर से स्कूल जाने के बारे में मुकुंद कहते हैं कि मैं 11वीं क्लास पास करने के बाद में काफी खुश था, मैं साउथ मुंबई में आगे की पढ़ाई करने के लिए दाखिला लेने गया था, जहां मैं साहित्य की पढ़ाई करना चाहता था। लेकिन प्रिंसिपल रूम के भीतर कुछ मिनटों के भीतर ही मैं टूट गया, यहां मुझे बताया गया कि पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से ही होगी। मैंने अपनी पढ़ाई मराठी माध्यम से की थी, ऐसे में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करना मेरे लिए आसान नहीं था। मैं घर वापस जाकर काफी निराश था और मैंने पढ़ाई बंद कर दी।

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    बचपन में गुजर गए माता-पिता
    मुकुंद की अंग्रेजी भाषा में जानकारी अधिक नहीं है, इसी वजह से उन्होंने 7वीं कक्षा में दाखिला लिया है। बचपन में स्कूल के भीतर प्रिंसिपल रूम में जो चारी के साथ हुआ उसके कुछ दिनों बाद ही उनके माता-पिता का निधन हो गया था। चारी पांच भाई-बहन थे और अपना घर चलाने के लिए उन्होंने नौकरी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि हम खुद से अपना जीवन यापन कर रहे थे। मैंने कभी शेक्सपीयर को नहीं पढ़ा था ,लेकिन यह सुना था कि वह महान थे

    ऐसे लिया फैसला
    रिटायर होने के बाद चारी शरीर से कमजोर हो गए हैं और वह अपनी बहन के घर में रहते हैं, जोकि कॉलेज में साहित्य की पढ़ाई कर रहा है, मैंने उसके होमवर्क को देखा, जिसके बाद मेरा शौक इसके लिए बढ़ता गया। इसी वर्ष क्रॉफोर्ट मार्केट में जब चारी जा रहे थे तो उन्होंने कुछ बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म पहने जाते देखा, जिसके बाद उन्होंने फिर से स्कूल जाने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि मैं डिग्री हासिल करना चाहता था और इसके बिना खुद को अधूरा महसूस करता था। मुझे लगता है कि मेरे जीवन में कुछ ही वर्ष बचे हैं और उससे पहले मैं इसे हासिल कर लेना चाहता हूं।

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    English summary
    At the age 72 man started to go school to pursue his dream of degree in English literature.

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