Parenting Tips: पैरेंट्स की ये 5 आदतें बच्चे की मेंटल हेल्थ पर करती हैं असर, आज ही बदल लें ये आदत
Parenting Tips: आज के समय में पैरेंटिंग थोड़ी कठिन होती जा रही है क्योंकि इस भागती दौड़ती जिंदगी में वर्किंग माता-पिता के लिए घर संभालना और बच्चों की परवरिश करना आसान नहीं रह गया है। इस बढ़ते चैलेंज के अनुसार आजकल पैरेंटिंग कोच और वर्कशॉप भी होने लगे हैं।
मॉर्डन पैरेंटिंग में शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास पर भी बराबर जोर दिया जाता है। पैरेंट्स बच्चों के मानसिक विकास को भी बहुत ज्यागा महत्व देने लगे हैं। हालांकि कुछ पैरेंट्स इस पहलू से आज भी अनजान हैं और वो अनजाने में ही कुछ ऐसा कर देते हैं जिससे उनके बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। आइए जानते हैं पैरेंट्स की वो 5 आदतें जिससे उनके बच्चे का मेंटल हेल्थ प्रभावित होता है।

बच्चों को सही परवरिश देना एक कठिन और जिम्मेदारी भरा कार्य होता है। बदलते समय के साथ ही इन दिनों पैरेंटिंग भी बदलती जा रही है। ऐसे में कई पेरेंट्स जाने-अनजाने में कई ऐसी चीजें करते हैं जिससे उनके बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है।
बच्चों की उपलब्धियों को सेलिब्रेट न करना
-बच्चे अच्छे मार्क्स लेकर आएं, क्रिकेट मैच जीत कर आएं या फिर एक छोटी सी ड्राइंग बना कर आपको दिखाएं, ये जरूरी है कि आप उनकी हर छोटी-बड़ी उपलब्धियों की तारीफ करें।
-बच्चे की हार पर भी आप उसे पैंपर करें और बताएं कि ये जीवन का हिस्सा है, जो सभी को फेस करना पड़ता है। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो बच्चे मानसिक रूप से तनाव में रहेंगे और आगे अच्छा करने की उम्मीद भी खत्म कर लेंगे।
काल्पनिक उम्मीदें न रखें
आप चाहते हैं कि बच्चा पढ़ाई के साथ गेम्स और डांस जैसी अन्य एक्टिविटीज में भी अव्वल रहे लेकिन जब बच्चा ऐसा नहीं कर पाता है, तो आप अपनी काल्पनिक उम्मीदों के बारे में उसे बताते हुए ताना मारने लगते हैं। इससे उनके सेल्फ एस्टीम को नुकसान पहुंचता है और उन्हें लगता है कि वो इस काबिल नहीं हैं, जिससे उनकी मेंटल हेल्थ प्रभावित होती है।
जरूरत से ज्यादा नियम लागू करना
जब बच्चे के सुबह उठने से लेकर रात सोने तक एक-एक मिनट पैरेंट्स के नियमानुसार चलता है, तो एक समय के बाद उसे घुटन महसूस होने लगती है। वह हर बात पर आश्रित रहने लगता है और कोई भी काम खुद से करने से डरता है।
टैग देकर बात करना
बच्चे को ये कहना कि तुम लेजी हो, तुमने काम बिगाड़ दिया, तुम कमजोर हो, इस तरह की बातें उनके मन में बुरा असर डालती हैं। ऐसा करने से उनका आत्मविश्वास कमजोर होता है और वह खुद को कम समझने लगते हैं। इसलिए बच्चों से कभी भी इस तरह की बात न करें।
दूसरों से तुलना करना
किसी भी अन्य बच्चे से अपने बच्चे की तुलना उनके मन में जलन की दुर्भावना जगाती है और इस तरह वे सुधरने की जगह और भी बिगड़ते जाते हैं। तुलना करने की जगह इस बात को समझें कि सभी बच्चे अलग हैं और सबकी अलग काबिलियत है। अपने बच्चे की काबिलियत पहचानें और उसका हौसला बढ़ाएं।












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