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Lunar Eclipse 2025: चंद्रग्रहण पर इन 6 चीजों का कभी न करें सेवन, तन-मन को ऐसे रखें शांत

Lunar Eclipse 2025: भारतीय संस्कृति में चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण केवल खगोलीय घटना भर नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मानव जीवन, प्रकृति और वातावरण पर भी पड़ता है।

ग्रहण के समय मानें ये विशेष नियम
इसी कारण से प्राचीन काल से ही ग्रहण के दौरान खान-पान और दिनचर्या को लेकर कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। आज यानी 7 सितंबर 2025 (रविवार) को चंद्रगहण है जो कि भारत में दिखाई देगा। ये चंद्रग्रहण रात 8 बजकर 58 मनिट से शूरू होगा जो रात के करीब 2.30 बजे तक रहेगा।

Lunar Eclipse 2025

ग्रहण के समय खान-पान में बरतें ये सावधानी

चंद्रग्रहण प्रकृति की एक अद्भुत घटना है। हमारे ऋषि-मुनियों ने इसके समय कुछ विशेष नियम बनाए ताकि लोग सतर्क रहें और अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकें। चाहे आप इसे धार्मिक मान्यता मानें या वैज्ञानिक दृष्टि से देखें, ये निश्चित है कि ग्रहण के दौरान खान-पान में सावधानी बरतना हमारी सेहत के लिए फायदेमंद है।

शरीर और मन दोनों संवेदनशील हो जाते हैं

ग्रहण काल में शरीर और मन दोनों संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में कई तरह की वस्तुओं के सेवन पर रोक लगाई जाती है। आइए जानते हैं कि चंद्रग्रहण के समय किन चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए और इसके पीछे क्या मान्यता है।

चंद्रग्रहण पर इन चीजों का न करें सेवन

1. भोजन और पानी का सेवन

ग्रहण काल में भोजन और पानी लेने की मनाही होती है। माना जाता है कि इस समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है, जिससे भोजन दूषित हो सकता है। यही कारण है कि ग्रहण शुरू होने से पहले लोग भोजन समाप्त कर लेते हैं और ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके शुद्ध होकर ही कुछ खाते-पीते हैं।

2. दूध और डेयरी उत्पाद

दूध, दही, मक्खन, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद ग्रहण के समय नहीं खाने चाहिए। परंपरा के अनुसार ग्रहण की छाया में ये पदार्थ जल्दी खराब हो जाते हैं और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि कई घरों में ग्रहण से पहले दूध या दही में तुलसी पत्र डालने की परंपरा है, जिससे उसमें खराबी न आए।

3. पके हुए भोजन

चंद्रग्रहण लगने से पहले जो भी भोजन पकाया जाता है, उसे ग्रहण समाप्त होने तक नहीं खाना चाहिए। शास्त्रों में ये माना गया है कि ग्रहण काल में पका हुआ भोजन दूषित हो जाता है और उसका सेवन रोग पैदा कर सकता है। इसलिए ग्रहण खत्म होने के बाद ही ताजा भोजन बनाने और खाने की परंपरा है।

4. कटे-छीले फल और सब्जियां

ग्रहण काल में पहले से कटे या छीले हुए फल-सब्जियां भी खाने योग्य नहीं मानी जातीं। मान्यता है कि इनमें नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव जल्दी पड़ता है। यदि इनका सेवन करना ही हो तो ग्रहण से पहले उन पर तुलसी पत्र या कुशा रखने की परंपरा है।

5. तेल और तैलीय भोजन

तले-भुने और तेलीय भोजन ग्रहण काल में नहीं खाने चाहिए। ये पदार्थ वैसे भी भारी और पचने में कठिन होते हैं। ग्रहण के समय शरीर की पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है, इसलिए ऐसे भोजन का सेवन स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।

6. मांसाहारी भोजन और नशा न करें

मांस, मछली, अंडा, शराब या किसी भी तरह का नशा ग्रहण के समय वर्जित माना गया है। ग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में मांसाहार या नशा न केवल स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है बल्कि मानसिक असंतुलन भी पैदा कर सकता है।

ग्रहण का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आधुनिक विज्ञान ग्रहण को केवल खगोलीय घटना मानता है और खान-पान पर रोक को अंधविश्वास कहता है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो ग्रहण के दौरान वातावरण में बदलाव होता है, सूर्य की किरणें सीधे नहीं पड़तीं और बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं। इसी वजह से भोजन जल्दी खराब होने की संभावना रहती है। इस दृष्टि से भी ग्रहण के समय सावधानी बरतना समझदारी है।

ग्रहण के दौरान क्या करें?

-ग्रहण शुरू होने से पहले भोजन समाप्त कर लें।

-ग्रहण के बाद स्नान करके ताज़ा भोजन बनाएं और ग्रहण की समाप्ति के बाद ही सेवन करें।

-बचा हुआ भोजन या दूध-दही जैसी चीजों में तुलसी पत्र डाल दें।

-ग्रहण के समय पूजा-पाठ, मंत्र जप और ध्यान करना शुभ माना जाता है।

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