Agrasen jayanti 2021: जानिए कौन थे वैश्य समाज के संस्थापक महाराजा अग्रसेन
Agrasen jayanti 2021: जानिए कौन थे वैश्य समाज के संस्थापक महाराजा अग्रसेन
नई दिल्ली, 07 अक्टूबर: महाराजा अग्रसेन वैश्य समाज के संस्थापक माने जाते हैं। महाराजा अग्रसेन अग्रोहा के एक महान भारतीय राजा थे। महाराजा अग्रसेन को पौराणिक समाजवाद के प्रर्वतक, युग पुरुष के तौर पर याद किया जाता है। अग्रसेन पशु बलि के खिलाफ थे और इसलिए उन्होंने वैश्य धर्म स्वीकार किया था। 7 अक्टूबर को महाराजा अग्रसेन की जयंती है। अग्रसेन जयंती हिंदू कैलेंडर के अश्विन महीने के चौथे दिन मनाई जाती है और इस साल यह 7 अक्टूबर को है। महाराजा अग्रसेन को वैश्य समाज के पिता के रूप में पूजा जाता है और उनकी जयंती मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाई जाती है। क्षत्रिय कुल में जन्मे महाराजा अग्रसेन जिस शहर अग्रोहा के राजा थे वह एक व्यापारियों का शहर था। कहा जाता है कि इस शहर की स्थापना भी महाराजा अग्रसेन ने की थी।

महाराजा अग्रसेन ने समाज में एकता और सद्भाव का उपदेश दिया था। यही कारण है कि मुख्य रूप से उनके अनुयायी अग्रसेन जयंती के दिन गरीबों में मुफ्त भोजन और दवाईं बाटंते हैं। महाराजा अग्रसेन के सम्मान में भारत सरकार ने 1976 में उनकी 5100वीं जयंती पर एक डाक टिकट भी जारी किया था। महाराज अग्रसेन की जयंती भारत में खासकर हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में मनाई जाती है।
जानिए महाराजा अग्रसेन की जिंदगी से जुड़ी अहम बातें
-धार्मिक मान्यतानुसार महाराजा अग्रसेन का जन्म सूर्यवंशीय महाराजा वल्लभ सेन के अंतिम काल और कलियुग की शुरुआत में आज से लगभग 5143 वर्ष पूर्व हुआ था। महाराजा अग्रसेन समस्त खांडव प्रस्थ, बल्लभ गढ़, अग्र जनपद के राजा था। कहा जाता था कि उनके राज में कोई भी दुखी और लाचार नहीं था। हालांकि बाद में महाराजा अग्रसेन उत्तर भारत में आकर बस गए और यहीं इन्होंने अग्रोहा शहर की स्थापना की।
-धार्मिक मान्यतानुसार महाराजा अग्रसेन भगवान राम के पुत्र कुश के 34 वीं पीढ़ी के माने जाते हैं। कहा जाता है कि 15 साल की उम्र में अग्रसेन पांडवों के पक्ष से महाभारत युद्ध लड़ा था। कहा ये भी जाता है कि भगवान कृष्ण ने कहा था कि अग्रसेन कलयुग में एक युग पुरुष बनकर अवतरित होंगे, जो द्वापर युग की समाप्ति के बाद शुरू होगा।
- वहीं भारतेंदु हरिश्चंद्र के वृत्तांत के मुताबिक महाराजा अग्रसेन एक सूर्यवंशी क्षत्रिय राजा थे। भारतेंदु हरिश्चंद्र के अनुसार, महाराजा अग्रसेन का जन्म महाभारत महाकाव्य काल में द्वापर युग के आखिरी चरण में हुआ था और अग्रसेन भगवान कृष्ण के समकालीन थे। महाराजा अग्रसेन राजा वल्लभ देव के पुत्र थे, जो भगवान राम के बेटे कुश के वंशज थे। इन्होंने लिखा है कि अग्रसेन का विवाह राजा नागराज कुमुद की बेटी माधवी से हुआ था। इनके 18 बच्चे थे। जिनसे अग्रवाल गोत्र अस्तित्व में आया था।
- महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य को 18 अलग-अलग गणराज्यो में विभाजित करवाया था। जिसे अग्रेय गणराज्य या अग्रोदय कहा जाता है। महाराजा अग्रसेन ने अपने 18 अलग-अलग गणराज्यो के लिए 18 गुरुओ के नाम पर 18 गोत्र की स्तापना की थी।












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